Fino Payments Bank ने सितंबर 2026 के अपने आंकड़े पेश किए हैं, जिसमें लोन रेफरल डिस्बर्सल **223%** बढ़कर **₹278 करोड़** पर पहुंच गया है, हालांकि नए अकाउंट खोलने की रफ्तार **17%** धीमी हुई है।
बदल रहा है बिजनेस का फोकस
Fino Payments Bank का लेटेस्ट अपडेट बताता है कि कंपनी अब स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) बनने की अपनी रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। बैंक का पूरा ध्यान अब ज्यादा मार्जिन वाले लेंडिंग और लॉन्ग-टर्म डिपॉजिट्स पर है। इसी रणनीति के तहत, सितंबर में लोन रेफरल डिस्बर्सल 223% की छलांग लगाकर ₹278 करोड़ हो गया है। इसके अलावा, कुल डिपॉजिट्स में भी 13% की ग्रोथ देखी गई है और यह ₹2,794 करोड़ पर पहुंच गया है। बैंक की कैश मैनेजमेंट सर्विसेज (CMS) का थ्रूपुट भी 10% बढ़कर ₹6,918 करोड़ रहा।
कहाँ दिख रही है कमजोरी?
एक तरफ लेंडिंग में तेजी है, तो दूसरी तरफ नए बिजनेस में सुस्ती साफ है। बैंक में नए डिपॉजिट अकाउंट खोलने की संख्या 17% घटकर 2,44,763 रह गई है, जो पिछले साल इसी दौरान 2,94,846 थी। साथ ही, ओवरऑल ट्रांजैक्शन थ्रूपुट में 10% की गिरावट दर्ज की गई है और यह घटकर ₹3,469 करोड़ रह गया है। खास बात यह है कि B2B UPI (P2M) थ्रूपुट इस दौरान शून्य रहा, जिसने ट्रांजैक्शन रेवेन्यू पर असर डाला है।
मैनेजमेंट और रेगुलेटरी अपडेट
इस बीच, बैंक ने लीडरशिप में स्थिरता बनाए रखने के लिए अंतरिम CFO अनूप अग्रवाल का कार्यकाल 3 महीने के लिए 6 अक्टूबर 2026 से बढ़ा दिया है। हालांकि, निवेशक GST से जुड़ी जांच और फिनटेक सेक्टर में बढ़ते रेगुलेटरी दबाव को लेकर भी सतर्क हैं। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि बैंक अपने SFB लाइसेंस की प्रक्रिया को कितनी जल्दी पूरा करता है और नए अकाउंट्स में आई गिरावट को कैसे रिकवर करता है।
