मुनाफे में भारी गिरावट, वजहें क्या?
Fino Payments Bank ने मार्च तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें नेट प्रॉफिट में 70% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट ₹7.1 करोड़ पर आ गई है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले काफी कम है। इस गिरावट की मुख्य वजहें बैंक के स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) में बदलने की प्रक्रिया में लगने वाला भारी खर्च और मैनेजमेंट से जुड़ी चिंताएं हैं।
मुख्य कमाई पर दबाव, रेवेन्यू में सेंध
बैंक की मुख्य कमाई के जरिया, जैसे कि डिजिटल पेमेंट सर्विसेज (DPS) और आधार एनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AEPS), में काफी कमी आई है। DPS से रेवेन्यू में 70% की गिरावट आई, जो घटकर ₹40.5 करोड़ रह गया। डोमेस्टिक मनी ट्रांसफर (DMT) में भी गिरावट देखी गई। कैश मैनेजमेंट सर्विसेज (CMS) का हिस्सा भी 64% से घटकर 46% हो गया, जो बढ़ती प्रतिस्पर्धा और जोखिम फ्रेमवर्क में रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है। इस कारण, तिमाही के कुल रेवेन्यू में 31% की गिरावट आई और यह ₹340 करोड़ पर पहुंच गया। पिछले साल के Q3 FY26 में भी नेट प्रॉफिट में 46.99% की गिरावट आई थी। इन नतीजों के बीच, पिछले एक साल में Fino Payments Bank के शेयर में लगभग 48.73% की बड़ी गिरावट आई है।
SFB बनने का महंगा सफर
स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) बनने की योजना, जिसके लिए दिसंबर 2025 में सैद्धांतिक मंजूरी मिली थी, एक महंगा प्रोजेक्ट है। SFB ऑपरेशंस के लिए जरूरी टेक्नोलॉजी अपग्रेड, विशेष रूप से Finacle CBS में माइग्रेशन, के कारण 'अन्य वित्तीय लागतें' पिछले साल के ₹34.2 करोड़ से बढ़कर ₹50.6 करोड़ हो गईं। बैंक को इस कनवर्जन को पूरा करने के लिए अगले 12-18 महीनों में अतिरिक्त ₹100 करोड़ खर्च करने होंगे। बैंक का लक्ष्य FY30 तक ₹10,000 करोड़ का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) हासिल करना है। हालांकि Fino एक एसेट-लाइट मॉडल का लक्ष्य रख रहा है, लेकिन तत्काल वित्तीय खर्च और क्रियान्वयन जोखिम काफी ज्यादा हैं। AU Small Finance Bank जैसी अन्य SFBs की तुलना में, Fino को अपनी मुख्य बिजनेस को ठीक करते हुए रणनीतिक बदलाव के लिए फंड जुटाने की दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
लीडरशिप और रेगुलेटरी चिंताएं
ऑपरेशनल और ट्रांजिशन से जुड़े दबावों के बीच, नेतृत्व और रेगुलेटरी संबंधी चिंताएं भी बढ़ गई हैं। हाल ही में MD & CEO ऋषि गुप्ता की गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) जांच के संबंध में गिरफ्तारी और बाद में मिली जमानत ने अनिश्चितता पैदा कर दी है। बैंक का कहना है कि यह जांच प्रोग्राम मैनेजर्स से संबंधित है, न कि Fino के सीधे GST अनुपालन से। यह डेवलपमेंट ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय फिनटेक सेक्टर पर रेगुलेटरी जांच का दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा, AU Small Finance Bank और Equitas Small Finance Bank जैसे प्रतिद्वंद्वियों से भी Fino को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। Fino का P/E रेशियो लगभग 19.98-20.00 है, जो Jana Small Finance Bank (6.53) से काफी ज्यादा और Ujjivan Small Finance Bank (22.4x) के आसपास है। लेकिन गिरते मुनाफे को देखते हुए, बिना किसी स्पष्ट सुधार के यह वैल्यूएशन उचित नहीं लगता।
आगे क्या? एनालिस्ट का नजरिया
इन चुनौतियों के बावजूद, Fino Payments Bank मजबूत गवर्नेंस और SFB लाइसेंसिंग के लिए उपयुक्त एसेट-लाइट बिजनेस मॉडल बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। मार्च 2026 तक बैंक की जमा राशि ₹2,957 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई और ग्राहक आधार में 22% की वृद्धि होकर 1.75 करोड़ हो गया। एनालिस्ट्स का Fino Payments Bank पर सामान्य तौर पर 'होल्ड' (Hold) का नजरिया है, जिसमें 1-वर्षीय प्राइस टारगेट लगभग ₹177.42 है। हालांकि कुछ विश्लेषणों के अनुसार स्टॉक अपनी आंतरिक वैल्यू से कम पर ट्रेड कर रहा है, लेकिन महत्वपूर्ण ऑपरेशनल चुनौतियां, SFB ट्रांजिशन की लागतें और हालिया नेतृत्व संबंधी चिंताएं निकट भविष्य में संभावित तेजी को सीमित कर रही हैं।
