क्या हुआ?
Bombay Stock Exchange (BSE) पर Fino Payments Bank के शेयर 10.1% चढ़ गए। वजह है मई 2026 के लिए आया बैंक का बिजनेस परफॉर्मेंस रिपोर्ट। रिपोर्ट में बैंक की मुख्य बैंकिंग योजनाओं में दमदार ग्रोथ और पुराने ट्रांजेक्शन बिजनेस में बड़ी गिरावट, दोनों का जिक्र है। बैंक ने मई में करीब 2.9 लाख नए डिपॉजिट अकाउंट्स खोले, जो पिछले साल के मुकाबले 29% ज्यादा हैं। वहीं, एवरेज टोटल डिपॉजिट 10% बढ़कर ₹2,762 करोड़ हो गया।
लोन की ओर बढ़ा बैंक
सबसे खास बात रही लोन रेफर्स (Loan Referrals) में हुई जबरदस्त ग्रोथ। यह ₹210 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल मई के ₹73 करोड़ से 186% ज्यादा है। यह दिखाता है कि बैंक सिर्फ पेमेंट प्रोसेसर बनकर नहीं रहना चाहता। सिक्योर लोन (Secured Loans) को रेफर करके, बैंक एक क्रेडिट बुक और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है, जिसका इस्तेमाल वह स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) लाइसेंस मिलने के बाद सीधे तौर पर करेगा। इस बदलाव से बैंक की कमाई का जरिया भी बदलेगा, जो ट्रांजेक्शन फीस से हटकर इंटरेस्ट इनकम (Interest Income) पर आधारित होगा।
ट्रांजेक्शन में गिरावट क्यों?
लोन और डिपॉजिट में ग्रोथ अच्छी रही, लेकिन एक बड़ी चिंता भी सामने आई। बैंक के ओवरऑल ट्रांजेक्शन थ्रूपुट में 48% की गिरावट आई है, जो ₹2,546 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल यह ₹4,863 करोड़ था। खास तौर पर, बैंक का B2B डिजिटल थ्रूपुट तो शून्य हो गया, जो पिछले साल मई में ₹3,527 करोड़ था। यह कोई एक्सीडेंटल गिरावट नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है। बैंक अपने B2B सेगमेंट के प्रोडक्ट्स और रिस्क प्रोफाइल का फिर से मूल्यांकन कर रहा है। निवेशकों के लिए इसका मतलब है कि बैंक अब कम मार्जिन वाले या ज्यादा रिस्क वाले सेगमेंट्स को छोड़ रहा है, ताकि वह एक रेगुलेटेड स्मॉल फाइनेंस बैंक के तौर पर काम कर सके। साथ ही, UPI के बढ़ते इस्तेमाल ने भी पुराने कैश-आधारित पेमेंट सिस्टम की प्रासंगिकता कम कर दी है।
स्मॉल फाइनेंस बैंक में बदलाव
Fino Payments Bank की पूरी कहानी अभी स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) बनने की है। पेमेंट बैंक के विपरीत, जो ज्यादा लोन नहीं दे सकता, SFB डिपॉजिट ले सकता है और सीधे ग्राहकों को लोन भी दे सकता है, जिससे रेवेन्यू मॉडल पूरी तरह बदल जाता है। लेकिन इस बदलाव के लिए बैंक को कड़े रेगुलेटरी नियमों को पूरा करना होगा, जैसे कैपिटल एडिक्वेसी (Capital Adequacy), ऑपरेशनल रिस्क मैनेजमेंट (Operational Risk Management) और एक मजबूत क्रेडिट असेसमेंट सिस्टम (Credit Assessment System) तैयार करना। Ezee.ai के साथ मिलकर लैंडिंग इकोसिस्टम (Lending Ecosystem) बनाना और Finacle-बेस्ड कोर बैंकिंग सिस्टम (Core Banking System) लागू करना, इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
रिस्क और आगे क्या?
निवेशकों को अब बैंक के नए लेंडिंग बिजनेस की क्वालिटी और टिकाऊपन पर ध्यान देना चाहिए। जैसे-जैसे बैंक ट्रांजेक्शन-फी इनकम से दूर जाएगा, उसका प्रॉफिट मार्जिन इंटरेस्ट स्प्रेड (Interest Spread) पर ज्यादा निर्भर करेगा। सबसे अहम बात यह होगी कि बैंक अपने लोन की क्वालिटी को कैसे मैनेज करता है। इसके अलावा, SFB लाइसेंस मिलने की प्रक्रिया कितनी तेज होती है और नई टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने का खर्च कितना आता है, ये सब आने वाले समय में बैंक की फाइनेंशियल हेल्थ तय करेंगे। यह देखना भी अहम होगा कि बैंक अपने ऑपरेशनल खर्चों को कैसे कंट्रोल करता है, जबकि वह जानबूझकर अपने पुराने B2B वॉल्यूम को कम कर रहा है।
