नेतृत्व में निरंतरता, बड़े बदलावों के बीच
Fino Payments Bank के बोर्ड ने केतन मर्चेंट को 3 महीने के लिए अंतरिम मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद पर बनाए रखने का फैसला किया है। उनका यह कार्यकाल 27 मई, 2026 से शुरू होगा। यह फैसला बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक (MD) और CEO ऋषि गुप्ता के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद लिया गया है। मर्चेंट, जो पहले मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) थे, इस महत्वपूर्ण दौर में प्रबंधन में निरंतरता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
गुप्ता का जाना ऐसे समय में हुआ जब हाल ही में बैंक की नामांकन और पारिश्रमिक समिति ने उन्हें दूसरे कार्यकाल के लिए 'फिट और उचित' पाया था। नेतृत्व में यह बदलाव एक कारोबारी सहयोगी से जुड़े जीएसटी चालान की जांच के संबंध में चल रही जांच की पृष्ठभूमि में हुआ है, जिसके कारण गुप्ता की पहले गिरफ्तारी और बाद में जमानत पर रिहाई हुई थी।
संचालन पर फोकस और बैंकिंग लाइसेंस का अपग्रेड
नेतृत्व में अस्थिरता के बावजूद, Fino Payments Bank का लक्ष्य संचालन को स्थिर रखना है। बैंक ने 2025 के अंत में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से स्मॉल फाइनेंस बैंक में बदलने के लिए 'इन-प्रिंसिपल' मंजूरी प्राप्त करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हितधारक बैंक के वित्तीय प्रदर्शन पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। मार्च 2026 तक बैंक ने लगभग ₹2,957 करोड़ के रिकॉर्ड डिपॉजिट बैलेंस दर्ज किए और अपने रेफरल लेंडिंग बिजनेस में मजबूत वृद्धि देखी है।
बैंक को हाल ही में मुख्य अनुपालन अधिकारी (Chief Compliance Officer) के इस्तीफे सहित वरिष्ठ स्तर पर हुए बदलावों के बीच अपने बैंकिंग लाइसेंस को अपग्रेड करने की जटिल चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
वैल्यूएशन जोखिम और बाजार की नजर
Fino Payments Bank का वैल्यूएशन संरचनात्मक चुनौतियों और नियामक जांच से प्रभावित होता है। स्टॉक की कीमत में उतार-चढ़ाव देखा गया है, जो नियामक खबरों और प्रबंधन जांच से संबंधित चिंताओं से प्रभावित है। स्थापित बैंकों की तुलना में, Fino एक संवेदनशील नियामक वातावरण में काम करता है जहाँ कार्यकारी परिवर्तनों पर कड़ी नजर रखी जाती है।
बैंक की लगभग 7.37% की कम रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) और डिविडेंड (Dividend) की अनुपस्थिति बाजार के सतर्क रुख में योगदान करती है। बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट मॉडल पर इसकी निर्भरता इसे भुगतान प्लेटफॉर्म नियमों के विकास के प्रति संवेदनशील बनाती है। हालांकि कंपनी अपने टेक्नोलॉजी-आधारित, एसेट-लाइट मॉडल पर जोर देती है, लेकिन प्रबंधन में निरंतर बदलाव संस्थागत विश्वास के लिए एक चुनौती पेश करता है।
स्थिरीकरण की राह
अब बाजार का ध्यान Fino की नियामक समय-सीमा के भीतर स्मॉल फाइनेंस बैंक में अपने परिवर्तन को पूरा करने की क्षमता पर है। एक स्थायी CEO की नियुक्ति स्थिरीकरण का एक प्रमुख संकेतक होगी। इस बीच, अंतरिम व्यवस्था में, मौजूदा प्रबंधन की जमा राशि में वृद्धि और रेफरल लेंडिंग बिजनेस की गति को बनाए रखने की क्षमता पर ध्यान केंद्रित रहेगा, ताकि आगे कोई बाधा न आए।
