RBI की जांच के चलते MD की नियुक्ति पर रोक
Fino Payments Bank के बोर्ड ने अपने मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) ऋषि गुप्ता के शेयरहोल्डर अप्रूवल के लिए भेजे गए प्रस्ताव को वापस ले लिया है। बैंक ने गुरुवार शाम को यह ऐलान किया। यह कदम तब उठाया गया है जब RBI, ऋषि गुप्ता की 'फिट एंड प्रॉपर' स्थिति का दोबारा मूल्यांकन कर रही है। बैंक का कहना है कि यह फैसला 'ड्यू प्रोसेस' और 'साउंड कॉर्पोरेट गवर्नेंस' के तहत लिया गया है।
GST जांच और गिरफ्तारी का मामला
यह फैसला तब आया जब 27 फरवरी को ऋषि गुप्ता को एक गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, बाद में हैदराबाद कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ GST इंटेलिजेंस (DGGI) की जांच में ऑनलाइन बेटिंग से जुड़े ट्रांजैक्शन के जरिए करोड़ों रुपये की GST चोरी का खुलासा हुआ है। माना जा रहा है कि इन ट्रांजैक्शन के माध्यम से अरबों रुपये बैंकिंग चैनलों से गुजरे हैं। तेलंगाना हाई कोर्ट ने बाद में गुप्ता की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी और जमानत देने से इनकार कर दिया, जो मामले की गंभीरता को दर्शाता है। Fino Payments Bank ने फाइलिंग में यह भी कहा है कि गुप्ता की MD & CEO पद के लिए उम्मीदवारी 'अप्रभावित' है।
पेमेंट्स बैंक के लिए 'गवर्नेंस रिस्क'
यह स्थिति Fino Payments Bank को 'फिट एंड प्रॉपर' मानकों के पालन को लेकर जांच के दायरे में लाती है। RBI डायरेक्टर्स और सीनियर मैनेजर्स के लिए कड़े मापदंड तय करती है। Fino के लिए, जो एक पेमेंट्स बैंक से स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) बनने की राह पर है, ये गवर्नेंस के मुद्दे बड़ी चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं। भारत का फिनटेक सेक्टर, जिसकी वैल्यू $125 बिलियन से अधिक है, रेगुलेटरी निगरानी में है। ऐसे में कंप्लायंस बहुत जरूरी है। प्रतिस्पर्धी जैसे Paytm Payments Bank, PhonePe और Razorpay भी इसी माहौल में काम कर रहे हैं, लेकिन Fino में लीडरशिप की अनिश्चितता एक अलग जोखिम पैदा करती है। बाजार ने इस खबर पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, पिछले महीने Fino के शेयर में करीब 40% और पिछले साल 37% की गिरावट आई है। कंपनी का मार्केट वैल्यू लगभग ₹1,000-₹1,175 करोड़ के बीच है।
Fino के लिए बढ़ते जोखिम
MD की गिरफ्तारी और उनकी पुनर्नियुक्ति में देरी से Fino Payments Bank के लिए कई जोखिम खड़े हो गए हैं। अगर RBI, ऋषि गुप्ता को 'फिट एंड प्रॉपर' नहीं मानती है, तो बैंक के खिलाफ सीधी रेगुलेटरी कार्रवाई हो सकती है, जिससे बैंक की स्वायत्तता पर असर पड़ सकता है। चल रही GST चोरी की जांच यह भी सवाल उठाती है कि Fino के इंटरनल कंट्रोल और पार्टनर्स पर उसकी निगरानी कितनी मजबूत है। इससे सेक्टर में कंपनी की रेप्यूटेशन को नुकसान पहुंच सकता है। SFB में रूपांतरण की योजना में भी देरी हो सकती है या उसे कड़ी रेगुलेटरी समीक्षा से गुजरना पड़ सकता है। फिनटेक कंपनियों के लिए फंडिंग का माहौल भी टाइट हो गया है, जिससे गवर्नेंस के मुद्दे वाली कंपनियों के लिए कैपिटल जुटाना मुश्किल हो जाता है। शेयर में आई तेज गिरावट से निवेशक का भरोसा पहले ही हिल चुका है।
भविष्य की अनिश्चितता से निपटना
Fino Payments Bank ने ग्राहकों और स्टेकहोल्डर्स को आश्वस्त किया है कि उसकी सेवाएं निर्बाध रूप से जारी हैं। बैंक 27 मार्च, 2026 को एक इन्वेस्टर मीटिंग करने की योजना बना रहा है, जहां इन मुद्दों और अपनी स्ट्रेटेजी पर चर्चा हो सकती है। हालांकि एनालिस्ट्स के टारगेट प्राइस में रिकवरी की संभावना दिख रही है, लेकिन रेगुलेटरी सवाल और MD के लीगल मुद्दे निकट-अवधि के आउटलुक को अनिश्चित बना रहे हैं। RBI का 'फिट एंड प्रॉपर' रिव्यू और GST जांच के नतीजे Fino के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण होंगे।