RBI के शिकंजे में Fino Payments Bank के CEO
Fino Payments Bank के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं क्योंकि इसके एमडी और सीईओ, ऋषि गुप्ता, पिछले 45 दिनों से अधिक समय से अपनी जिम्मेदारियां ठीक से नहीं निभा पा रहे हैं। इसकी वजह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा उनके 'फिट एंड प्रॉपर' स्टेटस का रिव्यू है। इस अनिश्चितता का सीधा असर बैंक के स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) में रूपांतरण की रणनीतिक योजना पर पड़ रहा है, जो कि इसके बिजनेस ग्रोथ के लिए एक अहम कदम है।
क्या है 'फिट एंड प्रॉपर' रिव्यू?
बैंक ने सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को घोषणा की कि ऋषि गुप्ता, RBI द्वारा उनके 'फिट एंड प्रॉपर' स्टेटस के पुनर्मूल्यांकन के कारण नियमित रूप से कार्य करने में असमर्थ हैं। उम्मीद है कि नॉमिनेशन और रेमुनरेशन कमेटी, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और अंतिम RBI मंजूरी के बाद गुप्ता जल्द ही ऑफिस ज्वाइन करेंगे। संचालन में निरंतरता बनाए रखने के लिए RBI के समर्थन से एक अंतरिम सीईओ की नियुक्ति भी कर दी गई है। यह स्थिति फरवरी 2026 में DGGI द्वारा GST कानूनों के उल्लंघन के कथित आरोपों में गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद सामने आई है। Fino का कहना है कि ये मामले प्रोग्राम मैनेजर्स से संबंधित थे, न कि बैंक के सीधे अनुपालन से। इन खबरों के बीच, 13 अप्रैल 2026 को BSE पर स्टॉक 2.32% गिरकर ₹132.35 पर बंद हुआ।
नेतृत्व की उथल-पुथल के बावजूद मजबूत ग्रोथ
नेतृत्व के मुद्दों के बावजूद, Fino Payments Bank ने 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही के लिए मजबूत वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। मार्च 2026 तक बैंक के डिपॉजिट ₹2,950 करोड़ से अधिक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। चौथी तिमाही FY26 में करीब 7 लाख नए खाते खोले गए, जिससे ग्राहक आधार बढ़कर लगभग 1.75 करोड़ हो गया। लोन रेफरल बिजनेस में जोरदार उछाल देखा गया, जो पिछली तिमाही की तुलना में 96% बढ़कर ₹600 करोड़ के डिस्बर्सल तक पहुंच गया। बैंक ने ₹62.2 करोड़ की अपनी अब तक की सबसे अधिक तिमाही रिन्यूअल इनकम भी दर्ज की। ये आंकड़े बैंक के बढ़ते बिजनेस की ओर इशारा करते हैं, खासकर SFB में रूपांतरण की संभावना से, जिससे बैंक को सीधे लोन देने की अनुमति मिल जाएगी। हालाँकि, 'फिट एंड प्रॉपर' स्टेटस रिव्यू एक महत्वपूर्ण रेगुलेटरी बाधा बनी हुई है। RBI के बैंक लीडर्स के लिए कड़े मापदंड हैं, जिनमें उनकी सत्यनिष्ठा, आपराधिक रिकॉर्ड और वित्तीय स्थिति की जांच शामिल है।
गवर्नेंस रिस्क और शेयर पर असर
नेतृत्व की अस्थिरता और रेगुलेटरी जांच Fino Payments Bank के लिए महत्वपूर्ण जोखिम पैदा कर रही है। CEO के 'फिट एंड प्रॉपर' स्टेटस का जारी रिव्यू, पिछली GST गिरफ्तारी और ऑनलाइन गेमिंग ट्रांजैक्शन में संभावित ED जांच की रिपोर्टों (जिन्हें Fino खारिज करता है) के साथ मिलकर, गवर्नेंस पर एक अनिश्चितता का माहौल बना रहा है। हालांकि बैंक का प्रबंधन ऑपरेशनल स्थिरता पर जोर देता है और कहता है कि जांच में बैंक का सीधा अनुपालन शामिल नहीं है, निवेशक का विश्वास कमजोर हुआ है। इन चिंताओं के कारण मार्च 2026 से पहले के महीने में स्टॉक में लगभग 40% की गिरावट आई थी, और यह अपने 52-हफ्ते के निम्नतम स्तर ₹110.03 के करीब कारोबार कर रहा था। रेटिंग एजेंसी ICRA ने CEO की गिरफ्तारी के बाद Fino की रेटिंग्स को 'Watch with Developing Implications' श्रेणी में रखा था।
विश्लेषकों की राय और भविष्य की राह
विश्लेषक Fino Payments Bank के लिए 'BUY' की सिफारिश कर रहे हैं, जिनके प्राइस टारगेट ₹325 से ₹475 के बीच हैं। Fintel के अनुसार, मार्च 2027 के लिए औसत प्राइस टारगेट ₹351.90 है। SFB में सफल रूपांतरण एक प्रमुख संभावित उत्प्रेरक (catalyst) है। हालाँकि, CEO के 'फिट एंड प्रॉपर' स्टेटस का समाधान और किसी भी अतिरिक्त रेगुलेटरी कार्रवाई का परिणाम बैंक के भविष्य के विकास की राह तय करेगा।