CEO की गिरफ्तारी ने Fino Bank की लीडरशिप पर सवालिया निशान लगाया
Fino Payments Bank का बोर्ड आज, 29 अप्रैल 2026 को, CEO Rishi Gupta के भविष्य पर फैसला लेने के लिए बैठ रहा है। गुप्ता का तीन साल का कार्यकाल, जिसे Reserve Bank of India (RBI) ने 2 मई 2026 से शुरू करने की मंजूरी दी थी, अब सवालों के घेरे में है। उन्हें फरवरी में Directorate General of GST Intelligence (DGGI) ने गिरफ्तार किया था। उन पर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) चोरी करने और इनपुट टैक्स क्रेडिट (input tax credit) का गलत दावा करने का आरोप है। कथित तौर पर, यह धोखाधड़ी ₹3,000 करोड़ से ज़्यादा के ट्रांजैक्शन से जुड़ी है। बैंकिंग रेगुलेटर्स का कहना है कि इन आरोपों के चलते CEO पद के लिए उनकी उपयुक्तता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बोर्ड का यह फैसला बैंक के संचालन और रणनीति के लिए बेहद अहम होगा।
Small Finance Bank बनने की राह में रेगुलेटरी रुकावटें
Fino Payments Bank का Small Finance Bank (SFB) बनने का लक्ष्य अब अनिश्चितता की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, RBI इस प्रक्रिया को या तो टाल सकता है या फिर लाइसेंस देने पर दोबारा विचार कर सकता है। इसकी मुख्य वजह CEO की गिरफ्तारी और चल रही जांच है। यह SFB लाइसेंस Fino के विस्तार और नई सेवाएं शुरू करने के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, सुशासन (governance) को लेकर चिंताएं और चीफ कंप्लायंस ऑफिसर (Chief Compliance Officer) Aashish Pathak का 31 मार्च 2026 को इस्तीफा, इस ट्रांजिशन में काफी जोखिम बढ़ा रहे हैं। Payments Council of India ने तो वित्त मंत्री से इस मामले को लेकर वित्तीय क्षेत्र में जवाबदेही और सुशासन पर पड़ने वाले असर के बारे में चिंता जताई है। Fino का कहना है कि यह जांच थर्ड-पार्टी प्रोग्राम मैनेजरों को लेकर है, न कि बैंक की सीधी GST कंप्लायंस को लेकर, लेकिन रेगुलेटर्स का नजरिया महत्वपूर्ण है।
मार्केट में सतर्कता, पर एनालिस्टों का भरोसा बरकरार
Fino Payments Bank के शेयर को लेकर मार्केट में फिलहाल थोड़ी नरमी दिख रही है। 28 अप्रैल 2026 तक, इसके शेयर की कीमत लगभग ₹133-₹137 के बीच थी, जो कि साल की शुरुआत से अब तक की बड़ी गिरावट को दर्शाता है और यह S&P BSE 100 इंडेक्स से पिछड़ गया है। टेक्निकल इंडिकेटर्स भी 'Sell' या 'Strong Sell' का इशारा कर रहे हैं, क्योंकि शेयर अपने 200-दिन मूविंग एवरेज से काफी नीचे ट्रेड कर रहा है। इन कमजोर टेक्निकल सिग्नल्स और ऑपरेशनल चुनौतियों के बावजूद, एनालिस्टों ने आम तौर पर 'Buy' रेटिंग बनाए रखी है और टारगेट प्राइस ₹345-₹352 के बीच रखा है। यह बड़ा अंतर दिखाता है कि जहां एनालिस्ट लंबी अवधि में संभावना देख रहे हैं, वहीं मौजूदा निवेशक तत्काल सुशासन और रेगुलेटरी जोखिमों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। Fino का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹1,110-₹1,125 करोड़ है, और P/E रेशियो करीब 15.70 है।
प्रतिस्पर्धी SFB बाजार में Fino की कमजोरियां
Fino Payments Bank की मुख्य चुनौतियाँ सुशासन की कमजोरियों और फिनटेक सेक्टर में बढ़ती रेगुलेटरी निगरानी से जुड़ी हैं। Small Finance Banks (SFBs) को लाभप्रदता में कमी, मार्जिन पर दबाव और बढ़ी हुई क्रेडिट लागत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, और Gross Non-Performing Assets (GNPAs) के ऊंचे बने रहने की उम्मीद है। AU Small Finance Bank जैसे मुनाफे वाले प्रतियोगी भी भविष्य की ग्रोथ को लेकर चिंताओं के कारण स्टॉक में गिरावट देख रहे हैं। Fino का थर्ड-पार्टी प्रोग्राम मैनेजरों पर निर्भर रहना इसे उनके कार्यों से प्रभावित कर सकता है, जैसा कि वर्तमान जांच में देखा जा रहा है। चीफ कंप्लायंस ऑफिसर का इस्तीफा और वेतन को लेकर शेयरधारकों की चिंताएं सुशासन के मुद्दों को और बढ़ाती हैं। ये जोखिम Ujjivan और Equitas जैसे बड़े SFBs की तुलना में ज्यादा दिखते हैं, जिनसे कमाई में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है। अगर Fino का SFB लाइसेंस टल जाता है या रद्द हो जाता है, तो भीड़भाड़ वाले डिजिटल बैंकिंग बाजार में इसकी ग्रोथ की संभावना काफी सीमित हो जाएगी।
