SFB बनने की राह में अड़चन?
Fino Payments Bank के CEO, ऋषि गुप्ता की गिरफ्तारी ने बैंक की Small Finance Bank (SFB) में तब्दील होने की महत्वाकांक्षी योजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, बैंक के इंटरिम मैनेजमेंट ने भरोसा दिलाया है कि SFB की तैयारी तय समय पर है, लेकिन इस जांच के चलते बैंक के ऑपरेशनल मैनेजमेंट और उसकी इंटीग्रिटी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह जांच बैन की गई ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों से जुड़े अवैध फंड के फ्लो से जुड़ी है, जो थर्ड-पार्टी पेमेंट प्रोवाइडर्स के जरिए Fino से होकर गुजरे हैं।
शेयर में आई भारी गिरावट, मैनेजमेंट का बयान
इस खबर के सार्वजनिक होते ही Fino Payments Bank के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। शेयर ₹167.80 के अपने 52-हफ्ते के नए निचले स्तर पर पहुंच गए, जो कि हालिया ₹211 के स्तर से काफी नीचे है। इसने मार्केट में फैली घबराहट को दिखाया। बाद में शेयर थोड़ा संभलकर लगभग फ्लैट ₹192.15 पर बंद हुए। इंटरिम हेड और CFO केतन मर्चेंट ने स्पष्ट किया कि 26 फरवरी, 2026 तक कस्टमर के ₹2,250 करोड़ सुरक्षित थे और बिजनेस वॉल्यूम पर कोई असामान्य असर नहीं पड़ा। उन्होंने इस मामले को "प्रोग्राम मैनेजर" से जुड़ा बताया, न कि Fino की डायरेक्ट टैक्स देनदारी से।
कंपनी की पोजीशन और जांच का दायरा
Fino Payments Bank की मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Cap) करीब ₹1,600 करोड़ है और इसका P/E रेश्यो लगभग 23.1 है। यह डिजिटल पेमेंट सेक्टर में ऑपरेट करती है, जिसके 2026 तक $10 ट्रिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, Fino का वैल्यूएशन कुछ अन्य बैंकों से ज्यादा है। AU Small Finance Bank, जो एक बड़ी इकाई है, का मार्केट कैप ₹71,000 करोड़ से ज्यादा है और P/E 30.8 है। RBI से दिसंबर 2025 से 18 महीने की समय-सीमा के साथ SFB स्टेटस के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बावजूद, Fino के बिजनेस मॉडल पर जांच की आंच आई है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि थर्ड-पार्टी पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर कथित तौर पर बैन की गई ऑनलाइन गेमिंग से मिले अवैध फंड को शेल कंपनियों और नॉन-KYC वाले अकाउंट्स के जरिए पहुंचा रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसे चैनलों से करीब ₹3,000 करोड़ का फंड ट्रांसफर हुआ है।
रेगुलेटरी जोखिम और SFB ट्रांजिशन पर असर
CEO ऋषि गुप्ता की DGGI (डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ GST इंटेलिजेंस) की जांच के तहत गिरफ्तारी ने Fino Payments Bank के लिए बड़े रेगुलेटरी और रेप्युटेशनल रिस्क पैदा कर दिए हैं। Fino का कहना है कि यह जांच उसके बिजनेस पार्टनर्स से जुड़ी है, न कि उसके अपने GST कंप्लायंस से। लेकिन, बैन की गई ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े अवैध फंड को इधर-उधर करने के आरोप, बैंक के ड्यू डिलिजेंस और उसके नेटवर्क की इंटीग्रिटी पर सवाल खड़े करते हैं। यह तब और चिंताजनक है जब Fino को हाल ही में RBI से SFB कन्वर्जन की इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिली है। SFB के लिए RBI के कड़े नियम हैं, जिनमें मजबूत गवर्नेंस और रिस्क मैनेजमेंट जरूरी है। अगर इस जांच से रेगुलेटरी मुश्किलें बढ़ीं, तो SFB में तब्दील होने की प्रक्रिया में देरी हो सकती है या यह अटक भी सकती है। AU Small Finance Bank जैसी बड़ी SFBs की तुलना में, Fino का मॉडल एजेंट नेटवर्क और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स पर ज्यादा निर्भर करता है, इसलिए इन पार्टनर्स की ठीक से जांच न होने पर बड़ा असर पड़ सकता है।
एनालिस्ट्स की राय और भविष्य की राह
कुछ एनालिस्ट्स ने अभी भी स्टॉक पर "Strong Buy" रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹345 के आसपास रखा है। लेकिन CEO की गिरफ्तारी और यह जांच, इस स्टॉक के लिए एक बड़ा ओवरहैंग (Overhang) है। यह शेयर की और अस्थिरता का कारण बन सकता है, खासकर अगर रेगुलेटरी चिंताएं बढ़ती हैं या SFB ट्रांजिशन प्रभावित होता है।
आगे क्या?
इन चुनौतियों के बावजूद, Fino Payments Bank का मैनेजमेंट RBI द्वारा निर्धारित 18 महीने की अवधि में SFB ट्रांजिशन पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। बैंक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए रेगुलेटर्स और स्टेकहोल्डर्स से लगातार बातचीत का दावा कर रहा है। एनालिस्ट्स का लॉन्ग-टर्म व्यू काफी हद तक पॉजिटिव है, लेकिन GST जांच के नतीजे और SFB लाइसेंसिंग के लिए इसकी क्षमता का लगातार बारीकी से मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण होगा।