ASSOCHAM समिट में सामने आया है कि देश में MSME सेक्टर के लिए **₹30 लाख करोड़** का क्रेडिट गैप है। अब बैंकों का फोकस केवल बेसिक बैंकिंग नहीं, बल्कि ग्रीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर जैसे नए सेक्टरों को फंड करने पर है ताकि **2047** तक **$30 ट्रिलियन** की इकोनॉमी का लक्ष्य हासिल हो सके।
भारत का फाइनेंशियल सेक्टर अब एक नई और स्पेशलाइज्ड मॉडल की ओर बढ़ रहा है। हाल ही में आयोजित ASSOCHAM समिट में विशेषज्ञों ने साफ किया कि $30 ट्रिलियन की इकोनॉमी बनने के लिए केवल बैंक खाते खोलना काफी नहीं है।
MSME सेक्टर पर सबसे बड़ी चुनौती
इस समय माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) को करीब ₹30 लाख करोड़ के कर्ज की कमी का सामना करना पड़ रहा है। YES Bank के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मनीष जैन का कहना है कि पारंपरिक तरीके से अब काम नहीं चलेगा। इसके लिए एडवांस्ड डिजिटल अंडरराइटिंग और इकोसिस्टम-बेस्ड फाइनेंसिंग की जरूरत है, ताकि छोटे व्यवसायों की क्रेडिटवर्थनेस को बेहतर तरीके से आंका जा सके।
नई पीढ़ी के उद्योगों पर दांव
Indian Banks Association के चीफ अतुल कुमार गोयल ने एक रोडमैप पेश किया है। उनका मानना है कि बैंकों को अब ग्रीन हाइड्रोजन, स्पेस टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग जैसे कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टरों को फंड करने की जरूरत है। ये सेक्टर भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूती देंगे।
वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) का अगला दौर
महाराष्ट्र के गवर्नर जिष्णु देव वर्मा ने जोर दिया कि डिजिटल लेनदेन की सफलता के बाद, अब ग्रामीण इलाकों, छोटे उद्यमियों और महिलाओं तक इंश्योरेंस, पेंशन और किफायती कर्ज पहुंचाना जरूरी है।
साइबर सिक्योरिटी और गवर्नेंस
ASSOCHAM के प्रेसिडेंट निर्मल के. मिंडा ने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे बैंक और फिनटेक कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं, गवर्नेंस और साइबर सिक्योरिटी पर भी बड़ा दांव लगाना होगा। बाजार की नजर अब इस पर है कि बैंक किस तरह टेक्नोलॉजी और रिस्क मैनेजमेंट के बीच संतुलन बनाकर MSME पोर्टफोलियो का विस्तार करते हैं।
