UPI MDR Policy: वित्त मंत्रालय ने अमेरिकी दबाव की खबरों को नकारा, डिजिटल पेमेंट के लिए बड़ा बदलाव

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
UPI MDR Policy: वित्त मंत्रालय ने अमेरिकी दबाव की खबरों को नकारा, डिजिटल पेमेंट के लिए बड़ा बदलाव

वित्त मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि UPI पर **0.4%** मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का फैसला पूरी तरह से घरेलू है। **15 अक्टूबर** से लागू होने वाला यह नियम सिर्फ **₹2,000** से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर प्रभावी होगा, जिसका उद्देश्य डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को आत्मनिर्भर बनाना है।

फैसले के पीछे की सच्चाई

वित्त मंत्रालय ने उन तमाम रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि UPI पर नया MDR फ्रेमवर्क अमेरिकी दबाव में लाया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 0.4% का यह चार्ज देश के डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्थिक रूप से मजबूत करने का एक स्वदेशी प्रयास है।

क्यों जरूरी था यह बदलाव?

अब तक 'जीरो-MDR' पॉलिसी के चलते बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स पर भारी वित्तीय बोझ पड़ रहा था। सिस्टम की मेंटेनेंस, सिक्योरिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरा खर्च ये कंपनियां खुद उठा रही थीं। अब बड़े ट्रांजैक्शंस पर चार्ज लगने से डिजिटल पेमेंट का मॉडल सस्टेनेबल बनेगा और बैंकों को घाटे से राहत मिलेगी।

आम ग्राहकों पर कितना असर?

यह नया नियम पूरी तरह से टारगेटेड है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कुल UPI ट्रांजैक्शन का केवल 4% हिस्सा ही इस दायरे में आएगा। ₹75,000 से ऊपर के पेमेंट पर चार्ज अधिकतम ₹300 तक सीमित रखा गया है। चूंकि यह सिर्फ ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर लागू है, इसलिए छोटे-मोटे रोजमर्रा के लेन-देन पहले की तरह ही फ्री बने रहेंगे।

RuPay कार्ड्स को प्राथमिकता

मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि UPI पर क्रेडिट ट्रांजैक्शन के लिए RuPay कार्ड्स ही एकमात्र विकल्प बने रहेंगे। इससे उन आशंकाओं पर विराम लग गया है कि यह नीति विदेशी नेटवर्क को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई है। सरकार का स्पष्ट रुख है कि घरेलू पेमेंट सिस्टम की सुरक्षा सर्वोपरि है।

अब मार्केट की नजर 15 अक्टूबर पर है, यह देखने के लिए कि पेमेंट एग्रीगेटर्स और मर्चेंट्स इस नई व्यवस्था को कैसे लागू करते हैं। सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि मर्चेंट्स इस चार्ज का बोझ ग्राहकों पर न डालें, ताकि डिजिटल इंडिया की रफ्तार बनी रहे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.