वित्त मंत्रालय ने बैंकों को PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana के तहत लोन प्रोसेसिंग को **10 दिन** से कम समय में पूरा करने का निर्देश दिया है। इस कदम का उद्देश्य लोन मिलने में हो रही देरी को खत्म करना है ताकि **2027** तक **1 करोड़** घरों तक सोलर बिजली पहुंचाई जा सके।
वित्त मंत्रालय ने सभी घरेलू बैंकों को सख्त हिदायत दी है कि वे PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana के तहत आने वाले लोन आवेदनों को 10 दिन के भीतर निपटाएं। सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक 1 करोड़ घरों को सोलर ऊर्जा से जोड़ने का है, लेकिन बैंक स्तर पर होने वाली देरी इस रफ्तार में बड़ी बाधा बन रही थी।
बैंकिंग सेक्टर की सुस्ती
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस समय लोन प्रोसेसिंग में भारी अंतर दिख रहा है। पब्लिक सेक्टर के बैंक औसतन 17 दिन ले रहे हैं, जबकि प्राइवेट बैंकों का औसत 19 दिन है। कई बड़े प्राइवेट बैंकों का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है, जहाँ आवेदनों की संख्या बहुत कम है। यह ₹75,000 करोड़ का एक फ्लैगशिप प्रोग्राम है। अक्टूबर 2026 तक 89 लाख से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं और 51 लाख से ज्यादा सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं।
इंटरनेशनल सपोर्ट और चुनौतियां
इस प्रोजेक्ट को वर्ल्ड बैंक (World Bank) से भी लगभग $890 मिलियन की फंडिंग मिली है। बावजूद इसके, मुख्य समस्या बैंकों के सिस्टम का नेशनल सोलर पोर्टल के साथ ठीक से इंटीग्रेट न हो पाना है। अगर बैंक अपने सिस्टम को अपडेट नहीं करते हैं, तो मार्च 2027 के टारगेट को हासिल करना मुश्किल होगा। अभी बहुत ज्यादा निर्भरता Punjab National Bank जैसे कुछ ही सरकारी बैंकों पर है, जो इसे लंबे समय के लिए रिस्की बनाता है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
अब निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या बैंक अपने डिजिटल प्रोसेस को स्ट्रीमलाइन कर पाते हैं। लोन की रफ्तार और सिस्टम इंटीग्रेशन पर होने वाले अपडेट ही तय करेंगे कि सोलर रोल-आउट की गति कितनी तेज होगी।
