सरकारी बीमा कंपनियों के लिए वित्त मंत्रालय का कड़ा निर्देश: अब प्रॉफिटेबिलिटी पर होगा फोकस

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AuthorAditya Rao|Published at:
सरकारी बीमा कंपनियों के लिए वित्त मंत्रालय का कड़ा निर्देश: अब प्रॉफिटेबिलिटी पर होगा फोकस

वित्त मंत्रालय ने सरकारी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों को अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव करने का आदेश दिया है। अब इन कंपनियों को मुनाफा देने वाले सेक्टर्स पर ध्यान देना होगा और क्लेम रेशियो को घटाना होगा, साथ ही खर्चों पर भी लगाम कसनी होगी।

वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS) ने सरकारी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों को एक नया फरमान जारी किया है। DFS सचिव संजय लोहिया की अध्यक्षता में हुई एक समीक्षा बैठक में यह साफ कर दिया गया कि कंपनियों को उन क्षेत्रों से दूरी बनानी होगी जो घाटे का सौदा साबित हो रहे हैं और अब पूरी तरह से प्रॉफिटेबल बिजनेस पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

क्लेम रेशियो और अनुशासन

इस निर्देश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 'इन्कर्ड क्लेम रेशियो' (ICR) को नीचे लाना है। सरकारी कंपनियां लंबे समय से ऊंचे क्लेम रेशियो से जूझ रही हैं, जो उनके मार्जिन पर बुरा असर डालता है। सरकार का मकसद एक अनुशासित अंडरराइटिंग का माहौल तैयार करना है। आने वाली तिमाही नतीजों (Quarterly Results) में इन रेशियो में सुधार निवेशकों के लिए एक बड़ा संकेत होगा कि बदलाव का असर दिखना शुरू हुआ है या नहीं।

नए KPI फ्रेमवर्क और डिजिटल खर्च

जवाबदेही तय करने के लिए सरकार एक स्टैंडर्ड 'की-परफॉर्मेंस इंडिकेटर' (KPI) फ्रेमवर्क लागू कर रही है। इससे न केवल सरकारी कंपनियों की परफॉर्मेंस को ट्रैक करना आसान होगा, बल्कि यह भी पता चल सकेगा कि लागत कम करने की गुंजाइश कहां है।

सरकार डिजिटल ट्रांस्फॉर्मेशन के पक्ष में तो है, लेकिन उसने कंपनियों को चेतावनी दी है कि IT पर होने वाला खर्च केवल दिखावा नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे कामकाज में वास्तविक बचत होनी चाहिए। साथ ही, कंपनियों से कहा गया है कि वे सोशल मीडिया के जरिए अपनी पहुंच उन क्षेत्रों में बढ़ाएं जहां इंश्योरेंस की पैठ अभी भी बहुत कम है।

निवेशकों के लिए चुनौतियां

निवेशकों को यह समझना होगा कि इस बदलाव को लागू करना आसान नहीं होगा। अगर कंपनियां अपनी प्राइसिंग को लेकर सख्त होती हैं, तो मार्केट शेयर गिरने का जोखिम बना रहता है, खासकर प्राइवेट प्लेयर्स के सामने जो पहले से काफी आक्रामक हैं। इसके अलावा, पुराने समय के हाई क्लेम रेशियो को रातों-रात ठीक करना एक बड़ी चुनौती है। आने वाले समय में मैनेजमेंट कैसे इन मुश्किलों को पार करता है और बिना सर्विस क्वालिटी खराब किए मुनाफे की ओर बढ़ता है, इस पर बाजार की पैनी नजर होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.