वित्त मंत्रालय अब बैंकों द्वारा लोन कलेक्शन और क्रेडिट मॉनिटरिंग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स की समीक्षा कर रहा है। EASE 9.0 एजेंडे के तहत यह ऑडिट तकनीक और ग्राहकों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
एआई का इस्तेमाल और सरकारी सख्ती
वित्त मंत्रालय ने अब यह परखना शुरू कर दिया है कि भारतीय बैंक किस तरह से लोन रिकवरी और क्रेडिट प्रोसेस में AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकार के 'Enhanced Access and Service Excellence' (EASE 9.0) फ्रेमवर्क का मुख्य लक्ष्य पब्लिक सेक्टर बैंकों के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाना है। अब सरकार केवल साधारण चैटबॉट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि क्रेडिट मॉनिटरिंग, फ्रॉड डिटेक्शन और ऑटोमेटेड अंडरराइटिंग जैसे संवेदनशील कामों में इस्तेमाल होने वाली एडवांस तकनीकों की बारीकी से जांच कर रही है।
क्यों हो रही है यह जांच?
अक्सर ऑटोमेटेड लेंडिंग प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों के डेटा की गोपनीयता और वसूली के आक्रामक तरीकों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि बैंक सिर्फ नई तकनीक न अपनाएं, बल्कि उनका इस्तेमाल सही और सुरक्षित तरीके से करें।
ओपेक एल्गोरिदम पर RBI की चिंता
इस ऑडिट में सबसे बड़ा मुद्दा 'ओपेक एल्गोरिदम' (Opaque Algorithms) का है। RBI के गाइडलाइंस के मुताबिक, अगर कोई AI मॉडल किसी का लोन रिजेक्ट करता है या डिफॉल्टर घोषित करता है, तो बैंक के पास उसका स्पष्ट और तार्किक कारण होना चाहिए जिसे एक इंसान समझ सके। अब बैंकों के लिए ऐसी प्रणालियां लागू करना अनिवार्य होगा जो पारदर्शी और जवाबदेह हों।
साइबर सुरक्षा और निवेशकों के लिए संकेत
मंत्रालय 'इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम' के साथ मिलकर यह सुनिश्चित कर रहा है कि AI मॉडल्स के जरिए यूजर डेटा के साथ कोई छेड़छाड़ न हो। निवेशकों के लिए साफ संदेश है कि डिजिटल बैंकिंग की ओर बढ़ता कदम अब अधिक सख्त कंप्लायंस (Compliance) और डेटा गवर्नेंस की मांग करता है। आने वाले समय में इन प्रणालियों के लिए एक मानक नियामक ढांचा तैयार होने की उम्मीद है, जो बैंकिंग सेक्टर की सुरक्षा के लिए बेहद अहम होगा।
