टैक्स रिफंड का कमाल: नतीजों में दिखा बड़ा उछाल
Federal Bank के लिए बीता फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही (Q4) शानदार रही। बैंक ने ₹1,259.10 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 22.22% ज़्यादा है। इस बंपर मुनाफे के पीछे मुख्य वजह टैक्स रिफंड पर मिला ₹4.56 अरब का ब्याज है, जिसने नतीजों को और भी बेहतर बना दिया।
कोर ऑपरेशन्स में मजबूती
केवल टैक्स रिफंड ही कहानी नहीं है, Federal Bank के कोर बिजनेस में भी अच्छी मजबूती दिखी। बैंक के क्रेडिट ग्रोथ में 12.7% का इज़ाफ़ा हुआ, जो पिछले तिमाही के 10.9% से बेहतर है। इसके अलावा, बैंक का CASA रेश्यो भी 270 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 32.94% हो गया है, जिससे फंड की लागत को मैनेज करने में मदद मिली है। फी इनकम ग्रोथ (Fee Income Growth) भी शानदार रही।
एसेट क्वालिटी में रिकॉर्ड प्रदर्शन
एसेट क्वालिटी की बात करें तो बैंक ने बेहतरीन प्रदर्शन जारी रखा है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) रिकॉर्ड 1.62% पर आ गए हैं, जबकि नेट एनपीए (Net NPA) सिर्फ 0.20% है। यह बैंक की सोची-समझी ग्रोथ स्ट्रैटेजी और प्रूडेंट रिस्क मैनेजमेंट को दर्शाता है।
मुनाफे को लेकर चिंताएं
लेकिन इन चमकदार नंबरों के बीच कुछ चिंताएं भी छिपी हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए प्रोविजन्स और कंटिंजेंसीज़ (Provisions and Contingencies) में भारी 150.55% का इजाफ़ा हुआ है, जो पिछले साल के ₹733.06 करोड़ से बढ़कर ₹1,836.67 करोड़ हो गया। इस वजह से पूरे फाइनेंशियल ईयर का प्रॉफिट ग्रोथ सिर्फ 1.61% रहा।
एक और अहम बात यह है कि बैंक का मुनाफा काफी हद तक नॉन-ऑपरेटिंग आय (Non-Operating Income) पर निर्भर है। इस तिमाही में टैक्स रिफंड से हुई कमाई, प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) का 74.57% रही। ऐसे में, यह सवाल उठता है कि क्या यह एक बार की कमाई टिकाऊ (sustainable) है या कोर बैंकिंग ऑपरेशन्स से इतनी कमाई हो पाएगी।
वैल्यूएशन और रेगुलेटरी रिकॉर्ड
वैल्यूएशन (Valuation) के मोर्चे पर भी कुछ चुनौतियां हैं। Federal Bank का करेंट ट्रेलिंग 12-महीने (TTM) P/E रेश्यो करीब 17-18x है, जो इसके ऐतिहासिक औसत 9-12x से काफी ऊपर है। ऐसे में, शेयर में और तेज़ी की गुंजाइश सीमित दिख रही है, खासकर जब Axis Bank, ICICI Bank और HDFC Bank जैसे बड़े बैंक इसी रेंज या इससे बेहतर वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं।
इसके अलावा, Federal Bank का रेगुलेटरी रिकॉर्ड (Regulatory Record) भी जांच के दायरे में रहा है। फरवरी 2025 में RBI ने बैंक पर डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट और अकाउंट खोलने के नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना लगाया था। 2018 में भी KYC/AML नियमों के उल्लंघन पर पेनल्टी लगी थी। ये मामले बैंक के गवर्नेंस पर कुछ सवाल खड़े करते हैं।
भविष्य का आउटलुक
भविष्य की बात करें तो एनालिस्ट्स (Analysts) उम्मीद कर रहे हैं कि Federal Bank का रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) अगले दो फाइनेंशियल इयर्स (FY26-28) में 150-200 बेसिस पॉइंट्स बढ़ सकता है, जो सेक्टर के औसत से बेहतर हो सकता है। अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए कंसेंसस EPS ₹16.14 रहने का अनुमान है। बैंक रिटेल डिपॉजिट्स पर फोकस कर रहा है, फंडिंग कॉस्ट को ऑप्टिमाइज़ कर रहा है और अपने एनआर (NR) डिपॉजिट बुक को ₹1 लाख करोड़ के पार ले गया है। यह सब कोर बिजनेस को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।
