Federal Bank की नई स्कीम: NRI के लिए 6.25% ब्याज दर पर USD जमा का मौका!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Federal Bank की नई स्कीम: NRI के लिए 6.25% ब्याज दर पर USD जमा का मौका!

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Federal Bank ने एक नई FCNR Max Deposit Scheme लॉन्च की है, जो नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) को अमेरिकी डॉलर (USD) जमा पर **6.25%** की ब्याज दर की पेशकश कर रही है। यह कदम बैंकों द्वारा रेगुलेटरी सपोर्ट के बीच विदेशी मुद्रा को आकर्षित करने के व्यापक चलन को दर्शाता है।

क्या है नई स्कीम?

Federal Bank ने 'FCNR Max Deposit Scheme' के नाम से यह नई प्रोडक्ट पेश की है। खास तौर पर नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) के लिए डिजाइन की गई इस स्कीम में अमेरिकी डॉलर जमा करने पर 6.25% प्रति वर्ष की ब्याज दर मिलेगी। यह ऑफर 3 से 5 साल तक की टेन्योर के लिए मान्य है। बैंक ने एक साल की अनिवार्य लॉक-इन अवधि भी रखी है। यदि ग्राहक एक साल बाद भी अपना पैसा निकालना चाहता है, तो बैंक 1% की पेनल्टी के साथ ब्याज दर को कम कर देगा।

बैंक क्यों चाहते हैं विदेशी मुद्रा?

FCNR (Foreign Currency Non-Resident) डिपॉजिट निवेशकों के लिए अपनी विदेशी मुद्रा को बिना रुपये की गिरावट के जोखिम के ब्याज कमाने का एक जरिया है। बैंकों के लिए, ये डिपॉजिट उनकी विदेशी मुद्रा लिक्विडिटी को मैनेज करने में मदद करते हैं। इससे डॉलर फंडिंग का एक स्थिर स्रोत मिलता है, जो उन बैंकों के लिए महत्वपूर्ण है जो ट्रेड फाइनेंस में शामिल हैं। यह कंपनियों को इम्पोर्ट, एक्सपोर्ट और अन्य अंतर्राष्ट्रीय ट्रांजेक्शन में मदद करता है।

जब बैंक अधिक विदेशी मुद्रा जुटाते हैं, तो उनके ट्रेड फाइनेंस ऑपरेशन बेहतर होते हैं और उन्हें इंटरबैंक मार्केट से महंगी उधारी लेने की जरूरत कम पड़ती है। इससे बैंक की फाइनेंसियल स्टेबिलिटी भी बढ़ती है।

बाजार में कौन-कौन है?

इस समय भारतीय बैंकिंग सेक्टर में विदेशी मुद्रा जमा को आकर्षित करने की कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। इसका एक बड़ा कारण रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा उठाए गए कदम हैं। RBI ने स्पेशल स्वैप फैसिलिटी (swap facility) पेश की है और इन डिपॉजिट्स को CRR (कैश रिजर्व रेशियो) और SLR (स्टैच्यूटरी लिक्विडिटी रेशियो) जैसे कुछ रिजर्वमेंट्स से अस्थायी रूप से छूट दी है। इन रेगुलेटरी छूटों के कारण बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा जुटाना सस्ता हो गया है।

Federal Bank के अलावा, YES Bank 6.60% तक और CSB Bank 7.05% तक की ब्याज दरें दे रहे हैं। ICICI Bank और Axis Bank जैसे बड़े बैंक भी लगभग 6% की दर से जमाएं स्वीकार कर रहे हैं।

कमाई पर क्या होगा असर?

विदेशी मुद्रा जमा से लिक्विडिटी तो बढ़ती है, लेकिन इसकी लागत भी है। डॉलर में 6.25% की ब्याज दर देना एक बड़ा वित्तीय वादा है। बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे इन फंडों को ऐसे एसेट्स में निवेश करें जिनसे डिपॉजिट की लागत से ज्यादा रिटर्न मिले। अगर जमा जुटाने की लागत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है और ट्रेड फाइनेंस से आय में समान वृद्धि नहीं होती है, तो बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर दबाव आ सकता है।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.