बैंकिंग सेक्टर में बड़े consolidation की आहट है। Federal Bank, Jana Small Finance Bank को खरीदने के लिए एडवांस्ड बातचीत कर रहा है, जिसकी अनुमानित वैल्यू **₹6,000 करोड़ से ₹6,500 करोड़** के बीच हो सकती है।
मर्जर की पूरी स्ट्रैटेजी
यह प्रस्तावित सौदा एक शेयर स्वैप डील के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें Federal Bank अपने शेयर Jana Small Finance Bank के शेयरधारकों को जारी करेगा। इस अधिग्रहण के पीछे मुख्य मकसद Federal Bank के 'प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग' पोर्टफोलियो को मजबूत करना है। माइक्रोफाइनेंस में मजबूत पकड़ होने के कारण, Jana SFB का नेटवर्क Federal Bank के लिए ग्रोथ का नया इंजन साबित हो सकता है।
ऑपरेशंस की बड़ी चुनौतियां
डील के ऐलान के बाद सबसे बड़ा सवाल मैनेजमेंट के सामने वर्कफोर्स इंटीग्रेशन का है। Federal Bank की मौजूदा स्ट्रेंथ करीब 17,000 कर्मचारियों की है, जबकि Jana SFB के पास 26,000 कर्मचारी हैं। इतने बड़े स्तर पर फील्ड स्टाफ और अलग-अलग वर्क कल्चर को एक साथ लाना एक बड़ी चुनौती होगी, जिससे ऑपरेशनल कॉस्ट पर दबाव बढ़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
RBI की मंजूरी इस डील की सबसे बड़ी कड़ी होगी, जो गवर्नरेंस और एसेट क्वालिटी की बारीकी से जांच करेगा। साथ ही, TPG जैसे बड़े इन्वेस्टर्स के लिए यह एक बड़ा एग्जिट रूट भी बन सकता है। इससे पहले भी दोनों के बीच 17% हिस्सेदारी को लेकर बात हुई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई थी। अब देखना होगा कि यह मर्जर रेगुलेटरी और ऑपरेशनल बाधाओं को कैसे पार करता है।
