Fairfax India की सब्सिडियरी FIH Mauritius Investments ने IIFL Finance में अपनी **1.49%** हिस्सेदारी बेच दी है। यह डील **₹374 करोड़** की है। इस हिस्सेदारी को American Funds और Capital Group जैसे इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने खरीदा है। इस बिक्री से NBFC में Fairfax की होल्डिंग कम हो गई है। IIFL Finance हाल ही में अपने गोल्ड लोन बिजनेस को लेकर रेगुलेटरी जांच के दायरे में थी।
किसने बेची और किसने खरीदी?
Fairfax India Holdings ने अपनी इन्वेस्टमेंट आर्म FIH Mauritius के जरिए IIFL Finance के 63.39 लाख शेयर्स बेच दिए हैं। यह डील 30 जुलाई 2026 को हुई और इसकी कुल वैल्यू ₹374.02 करोड़ रही। शेयर्स ₹590 प्रति शेयर के एवरेज प्राइस पर बेचे गए। इस बिक्री के बाद, IIFL Finance में Fairfax की हिस्सेदारी घटकर 15.18% (जो जून 2026 के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार थी) से कम हो जाएगी।
हालांकि, एक बड़े इंस्टीट्यूशनल प्रमोटर द्वारा शेयर बेचने के बावजूद, IIFL Finance के शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 2.14% चढ़कर ₹607.85 पर बंद हुए।
खरीदार कौन हैं?
Fairfax द्वारा बेचे गए ज्यादातर शेयर ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने खरीदे हैं। American Funds Insurance Series Global Small Capitalization Fund ने 0.04% हिस्सेदारी खरीदी, जबकि Capital Group के Smallcap World Fund ने कंपनी के 1.45% शेयर्स अपने नाम किए। यह बल्क डील बताती है कि बड़े निवेशक अपनी पोजीशन एडजस्ट कर रहे हैं, फिर भी NBFC सेक्टर में इंस्टीट्यूशनल इंटरेस्ट बना हुआ है।
रेगुलेटरी बैकग्राउंड और आगे क्या?
IIFL Finance के निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि यह बिक्री ऐसे समय पर हुई है जब कंपनी रेगुलेटरी निगरानी के दौर से गुजरी है। 2024 की शुरुआत में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कंपनी के गोल्ड लोन बिजनेस पर कई तरह की पाबंदियां लगाई थीं। इसकी वजह गोल्ड की शुद्धता की जांच और सर्टिफिकेशन में गड़बड़ियां थीं। हालांकि बाद में रेगुलेटर ने ये पाबंदियां हटा दी थीं, लेकिन इस घटना ने NBFC स्पेस में तेजी से क्रेडिट ग्रोथ और ऑपरेशनल कंप्लायंस से जुड़े जोखिमों को उजागर किया था।
तब से, कंपनी अपने गोल्ड लोन पोर्टफोलियो को मजबूत करने और होम लोन व माइक्रोफाइनेंस जैसे सेगमेंट्स में अपने प्रोडक्ट मिक्स को डाइवर्सिफाई करने पर फोकस कर रही है, ताकि किसी एक सेगमेंट पर निर्भरता कम हो सके।
बाजार के जानकारों का मानना है कि बड़े शेयरधारकों द्वारा हिस्सेदारी बेचना पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग का संकेत हो सकता है, न कि कंपनी के फंडामेंटल्स में विश्वास की कमी का। हालांकि, Fairfax के आंशिक रूप से बाहर निकलने का सटीक कारण उनकी अपनी कैपिटल एलोकेशन स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। आने वाली तिमाहियों में निवेशकों को कंपनी की प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखने की क्षमता, प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों के माहौल और रेगुलेटरी उम्मीदों को पूरा करने के लिए हाई लिक्विडिटी बफर की जरूरत पर नजर रखनी होगी। इसके अलावा, निवेशक कंपनी के एसेट क्वालिटी मेट्रिक्स पर भी नजर रख सकते हैं, क्योंकि बैड लोंस में किसी भी तरह की बढ़ोतरी वित्तीय प्रदर्शन पर भारी पड़ सकती है।
