Fairfax Financial Holdings ने अपने पोर्टफोलियो को नया रूप देते हुए Go Digit और IIFL Capital Services की हिस्सेदारी को IDBI Bank के साथ जोड़ने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम का मकसद एक बड़ा फाइनेंशियल कंग्लोमरेट बनाना है, हालांकि यह पूरी तरह से रेगुलेटरी मंजूरी पर निर्भर करेगा।
एक नया फाइनेंशियल पावरहाउस
कनाडा स्थित Fairfax Financial Holdings ने भारत में अपने निवेश को रीस्ट्रक्चर करने की बड़ी योजना बनाई है। कंपनी का इरादा Go Digit में अपनी 49% हिस्सेदारी और IIFL Capital में अपनी 30.2% हिस्सेदारी को IDBI Bank के दायरे में लाने का है। इस तरह एक ऐसा फाइनेंशियल सर्विस ग्रुप बनाने की तैयारी है, जो बैंकिंग, इंश्योरेंस और वेल्थ मैनेजमेंट तीनों सेक्टर को एक ही छत के नीचे ले आएगा।
नई टीम और नेतृत्व
इस बदलाव की निगरानी के लिए एक नई लीडरशिप टीम चुनी गई है। IDBI Bank के CEO राकेश शर्मा को इस पूरे ग्रुप की कमान सौंपी जा सकती है। साथ ही, ICICI Prudential Life Insurance के पूर्व MD एनएस कन्नन चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे और CSB Bank के पूर्व CEO सीवी राजेंद्रन ऑपरेशंस संभालेंगे।
क्या है आगे की राह?
Fairfax का कहना है कि इस बदलाव के बावजूद Go Digit और IIFL Capital के कामकाज में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। गौर करने वाली बात यह है कि IDBI Bank के विनिवेश के दौरान उसकी वैल्यूएशन करीब ₹52,878 करोड़ आंकी गई थी। इसके अलावा, Fairfax एक ओपन ऑफर के जरिए IIFL Capital में अपनी हिस्सेदारी को 51% तक बढ़ाने की प्रक्रिया में भी है।
रेगुलेटरी पेंच
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा अलर्ट 'रेगुलेटरी अप्रूवल' है। बैंकिंग, इंश्योरेंस और ब्रोकरेज बिजनेस को एक साथ लाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और इंश्योरेंस रेगुलेटर्स से कड़ी मंजूरी की जरूरत होगी। क्रॉस-होल्डिंग और हितों के टकराव (Conflict of Interest) को लेकर रेगुलेटर्स के नियम काफी सख्त हैं। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या यह स्ट्रक्चर रेगुलेटरी मानकों पर खरा उतर पाता है या नहीं।
