भारत में कर्ज का बोझ बढ़ा, FREED को मिली ₹60 करोड़ की फंडिंग
भारत में लोगों पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। दिसंबर 2024 तक, घरों पर कुल कर्ज सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 41.9% पहुंच गया था। पिछले दो सालों में हर कर्जदार पर औसत कर्ज 23% बढ़कर ₹4.8 लाख हो गया है। इसमें ज्यादातर कर्ज खपत (Consumption) और हाउसिंग लोन के अलावा अन्य खुदरा लोन (Non-housing Retail Loans) का है, जो कुल हाउसहोल्ड डेट का लगभग 55% है। इस बढ़ती कर्ज की समस्या से निपटने के लिए, भारत के पहले व्यापक डेट रिलीफ (Debt Relief) प्लेटफॉर्म, FREED को ₹60 करोड़ की फंडिंग मिली है।
इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Aavishkaar Capital ने किया है, जो एक प्रमुख इंपैक्ट इन्वेस्टर (Impact Investor) है। मौजूदा निवेशक Sorin Investments, Piper Serica, और Sattva Ventures ने भी इसमें हिस्सा लिया, जो FREED के बिजनेस मॉडल पर उनका गहरा भरोसा दिखाता है।
तकनीक से कैसे होगा कर्ज का समाधान?
साल 2020 में Ritesh Srivastava द्वारा स्थापित FREED, एक टेक-संचालित (Tech-driven) मॉडल का उपयोग करके लोगों को उनके असुरक्षित लोन (Unsecured Loans) चुकाने और क्रेडिट स्कोर (Credit Score) को फिर से बनाने में मदद करता है। कंपनी का कहना है कि वे 200,000 से अधिक ग्राहकों को सलाह दे चुके हैं और ₹3,200 करोड़ से ज्यादा के कर्ज का प्रबंधन कर रहे हैं।
इस नई पूंजी के साथ, FREED का लक्ष्य अगले 18 महीनों में लगभग $1 अरब (यानी करीब ₹8,300 करोड़) के तनावग्रस्त कर्ज (Stressed Debt) को अपने प्लेटफॉर्म पर लाना है। इस फंड का उपयोग कंपनी अपने ऑपरेशंस (Operations) का विस्तार करने, प्रोडक्ट कैपेबिलिटीज़ (Product Capabilities) को मजबूत करने और नए पार्टनरशिप्स (Partnerships) बनाने के लिए करेगी।
मैनेजमेंट का दावा है कि कंपनी हर महीने 10-12% की ग्रोथ दिखा रही है और उसके यूनिट इकोनॉमिक्स (Unit Economics) भी स्थिर हैं, जो प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) की ओर एक स्पष्ट रास्ता दिखाते हैं। यह फंडिंग FREED को कर्ज के बढ़ते जाल में फंसे लाखों भारतीयों की मदद करने में सक्षम बनाएगी।