All India Consumer Products Distributors Federation (AICPDF) ने 2 अक्टूबर को 'No UPI Day' मनाने का फैसला किया है। यह विरोध प्रदर्शन UPI पर संभावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क के खिलाफ है, जिससे सप्लाई चेन पर **₹9,000 करोड़** का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
विरोध की मुख्य वजह
All India Consumer Products Distributors Federation (AICPDF) ने सरकार को कड़ा संदेश देने के लिए कमर कस ली है। संगठन का दावा है कि अगर ट्रांजैक्शन पर MDR शुल्क लागू हुआ, तो पूरे FMCG सेक्टर पर सालाना ₹7,000 करोड़ से ₹9,000 करोड़ का भार पड़ेगा।
क्यों परेशान हैं छोटे रिटेलर्स?
FMCG कारोबार में मार्जिन बेहद कम, यानी सिर्फ 3.5% से 6% के बीच होता है। चूंकि अधिकतर सामान MRP पर बिकता है, इसलिए रिटेलर्स अपनी जेब से अतिरिक्त शुल्क भरने की स्थिति में नहीं हैं। व्यापारियों का कहना है कि अगर UPI पर शुल्क लगा, तो उनके छोटे से मुनाफे में बड़ी सेंध लग जाएगी।
'डबल-इम्पैक्ट' का डर
डिस्ट्रीब्यूटर्स के मुताबिक, इस शुल्क का असर दोतरफा होगा—एक बार जब ग्राहक रिटेलर को पेमेंट करेगा, और दूसरी बार जब रिटेलर डिस्ट्रीब्यूटर को भुगतान करेगा। GST के साथ जुड़कर यह लागत छोटे कारोबारियों के लिए 'अनसस्टेनेबल' हो जाएगी।
फिलहाल, सरकार और NPCI 'Zero MDR' मॉडल के पक्ष में रहे हैं, जिससे UPI को भारत में इतनी बड़ी सफलता मिली है। हालांकि, बैंक लगातार इस इकोसिस्टम की लागत का हवाला देकर शुल्क की मांग करते रहे हैं। अब देखना यह है कि RBI और सरकार इस तनावपूर्ण स्थिति पर क्या रुख अपनाते हैं, क्योंकि सप्लाई चेन की दक्षता सीधे तौर पर रिटेलर्स के UPI पेमेंट अपनाने पर निर्भर करती है।
