NBFCs के Revolving Credit पर RBI की सख्ती, FIDC ने जताई कड़ी आपत्ति

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AuthorMehul Desai|Published at:
NBFCs के Revolving Credit पर RBI की सख्ती, FIDC ने जताई कड़ी आपत्ति

Finance Industry Development Council (FIDC) ने RBI के उस ड्राफ्ट प्रपोजल पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है, जिसमें NBFCs को रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधा देने से रोकने की बात कही गई है। इंडस्ट्री बॉडी का कहना है कि अगर यह नियम लागू होता है, तो MSME के लिए वर्किंग कैपिटल हासिल करना मुश्किल हो जाएगा और उनकी ऑपरेशनल लागत बढ़ जाएगी।

नियम में बदलाव क्यों?

RBI ने 6 अगस्त, 2026 को एक ड्राफ्ट जारी किया है, जिसका मकसद NBFCs को रिवॉल्विंग क्रेडिट देने से रोकना है। रेगुलेटर चाहता है कि NBFCs अब सिर्फ 'टर्म लोन' स्ट्रक्चर का पालन करें। इस मसले पर फीडबैक देने की आखिरी तारीख 28 अगस्त, 2026 है।

क्या है समस्या?

मौजूदा व्यवस्था में, कई NBFCs ग्राहकों को फ्लेक्सिबल क्रेडिट लिमिट देते हैं, जिसे बैंक ओवरड्राफ्ट की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। RBI इसे बदलकर 'टर्म लोन' में डालना चाहता है, जिसमें पैसा चुकाने के बाद लिमिट को दोबारा रीस्टोर करने का विकल्प नहीं होगा। FIDC का तर्क है कि इससे छोटे कारोबारियों (MSMEs) पर बोझ बढ़ेगा, क्योंकि उन्हें हर बार बार-बार लोन लेना होगा, जिससे डॉक्यूमेंटेशन और एडमिनिस्ट्रेटिव फीस का खर्च बढ़ जाएगा। इसके अलावा, इससे छोटे बिजनेस अनरेगुलेटेड लेंडर्स के जाल में फंस सकते हैं।

RBI का मकसद और FIDC का सुझाव

RBI का यह कदम 'Evergreening' (लगातार लोन रोलओवर करना) की रिस्क को रोकने के लिए है। हालांकि, FIDC ने एक बीच का रास्ता सुझाया है। उनका कहना है कि अगर तय लिमिट के अंदर समय से पहले पेमेंट होता है, तो प्रिंसिपल रीस्टोरेशन की इजाजत मिलनी चाहिए। इससे वर्किंग कैपिटल की लिक्विडिटी बनी रहेगी।

आगे क्या होगा?

यह नियम TReDS पर फैक्टरिंग और सिक्योरिटी के बदले लोन जैसे सेगमेंट्स को भी प्रभावित कर सकता है। FIDC को डर है कि अगर नियम नहीं बदले, तो NBFCs को इन मार्केट से बाहर होना पड़ सकता है। निवेशकों की नजर अब इस पर है कि क्या RBI इंडस्ट्री की मांगों को मानकर कोई बीच का रास्ता निकालता है या फिर NBFCs के पूरे बिजनेस मॉडल में बड़े बदलाव की तैयारी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.