FDIC का बड़ा फैसला: Stablecoins अब Bank Deposit की तरह Insured नहीं, Banks पर पड़ेगा भारी असर!

BANKINGFINANCE
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
FDIC का बड़ा फैसला: Stablecoins अब Bank Deposit की तरह Insured नहीं, Banks पर पड़ेगा भारी असर!
Overview

अमेरिकी रेगुलेटर FDIC ने बड़ा कदम उठाते हुए यह साफ कर दिया है कि पेमेंट स्टेबलकॉइन्स (Stablecoins) जैसे USDC और USDT को सरकारी डिपॉजिट इंश्योरेंस (Deposit Insurance) या पास-थ्रू प्रोटेक्शन का लाभ नहीं मिलेगा। यह नियम इन डिजिटल एसेट्स को बैंक डिपॉजिट्स और टोकेनाइज्ड डिपॉजिट्स (Tokenized Deposits) से बिलकुल अलग करता है।

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स्टेबलकॉइन्स को सरकारी बीमा से बाहर

FDIC के चेयरमैन ट्रैविस हिल (Travis Hill) ने स्पष्ट किया है कि GENIUS Act के तहत, Circle के USDC और Tether के USDT जैसे स्टेबलकॉइन्स को FDIC इंश्योरेंस कवर नहीं करेगा। इस कानून के अनुसार, स्टेबलकॉइन जारी करने वालों को 100% रिजर्व रखना होगा, जो आमतौर पर कैश और शॉर्ट-टर्म US ट्रेजरी सिक्योरिटीज के रूप में रखे जाते हैं, यानी इन्हें दोबारा लोन पर नहीं दिया जा सकता।

ये रिजर्व्स एक सुरक्षा प्रदान करते हैं, लेकिन इनमें सरकारी गारंटी नहीं है। यही कारण है कि ये पारंपरिक बैंक डिपॉजिट्स से अलग हैं, जो $250,000 तक इंश्योर्ड होते हैं। दूसरी ओर, FDIC टोकेनाइज्ड डिपॉजिट्स (Tokenized Deposits) को लेकर सकारात्मक रुख दिखा रहा है, उन्हें पारंपरिक बैंक लायबिलिटी माना जा रहा है और वे सामान्य FDIC डिपॉजिट इंश्योरेंस के दायरे में आएंगे, भले ही उन्हें बनाने में किसी भी तकनीक का इस्तेमाल हुआ हो। इस तरह, एक दो-स्तरीय सिस्टम बन गया है: इंश्योर्ड, बैंक-आधारित टोकेनाइज्ड डिपॉजिट्स और अनइंश्योर्ड, जारीकर्ता-समर्थित स्टेबलकॉइन्स।

मार्केट पर असर और रेगुलेटरी परिदृश्य

प्रमुख स्टेबलकॉइन्स का मार्केट वैल्यू उनकी बढ़ती अहमियत को दर्शाता है। Tether (USDT) का मार्केट कैप $184 बिलियन के करीब है, जबकि USDC का वैल्यू $78 बिलियन है। इस बड़े पैमाने का असर पारंपरिक बैंकों पर पड़ सकता है। एनालिस्ट फर्म Jefferies का अनुमान है कि अगले 5 सालों में बैंकों से कोर डिपॉजिट्स में 3% से 5% की कमी आ सकती है, क्योंकि निवेशक बेहतर रिटर्न या आसान पेमेंट की तलाश में होंगे।

MID-2025 में पास हुआ GENIUS Act और डिजिटल एसेट मार्केट क्लैरिटी (CLARITY) एक्ट जैसे विधायी प्रयास डिजिटल एसेट्स के लिए एक स्पष्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने का लक्ष्य रखते हैं। CLARITY Act कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन (CFTC) के लिए डिजिटल कमोडिटीज़ और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के लिए अन्य डिजिटल एसेट्स की भूमिकाओं को स्पष्ट करने का प्रयास करता है। हालांकि, स्टेबलकॉइन जारीकर्ताओं या एक्सचेंजों को ब्याज या यील्ड (Yield) की पेशकश करने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं, इस पर बैंकों और क्रिप्टो फर्मों के बीच मतभेद जारी हैं।

संभावित जोखिम

नए नियमों से जहां स्पष्टता आई है, वहीं कुछ बड़े जोखिम भी पैदा हुए हैं। स्टेबलकॉइन्स, FDIC-इंश्योर्ड न होने के कारण, अगर जारीकर्ताओं के रिजर्व्स पर सवाल उठता है तो वे बैंक रन (Bank Run) का शिकार हो सकते हैं, इंश्योर्ड टोकेनाइज्ड डिपॉजिट्स के विपरीत। इससे बैंकों से पूंजी निकल सकती है, खासकर छोटे बैंकों से, जिससे फंडिंग की मुश्किलें बढ़ सकती हैं और लाभ मार्जिन कम हो सकता है। GENIUS Act मजबूत रिजर्व नियमों की मांग करता है, लेकिन इन रिजर्व्स की संरचना, प्रबंधन और जारीकर्ता की वित्तीय सेहत की बारीकी से जांच होगी।

भविष्य की राह

GENIUS Act द्वारा स्थापित रेगुलेटरी ढांचा, CLARITY Act के साथ मिलकर, स्टेबलकॉइन्स को मुख्यधारा के फाइनेंस में एकीकृत होने में मदद करेगा। इससे क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स, कोलैटरलाइजेशन (Collateralization) और ऑन-चेन ट्रेजरी मैनेजमेंट (On-chain Treasury Management) में इनोवेशन की उम्मीद है। FDIC का टोकेनाइज्ड डिपॉजिट्स के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण एक ऐसे भविष्य का संकेत देता है जहाँ बैंक डिजिटल एसेट इकोनॉमी में सक्रिय रूप से भाग लेंगे, जबकि अनइंश्योर्ड स्टेबलकॉइन्स से प्रतिस्पर्धा का सामना भी करेंगे।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.