FCNR इनफ्लो ₹50 अरब के पार, कंपनियों की कमाई में **10%** से ज़्यादा ग्रोथ की उम्मीद

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AuthorAditya Rao|Published at:
FCNR इनफ्लो ₹50 अरब के पार, कंपनियों की कमाई में **10%** से ज़्यादा ग्रोथ की उम्मीद

भारत में फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) डिपॉजिट इनफ्लो **$50 अरब** के पार जाने की उम्मीद है। मजबूत मांग के चलते यह संभव हो रहा है। साथ ही, एक्सिस बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट का मानना है कि क्रेडिट ग्रोथ और कमजोर रुपये के सहारे भारतीय कंपनियों के मुनाफे में इस तिमाही **डबल-डिजिट ग्रोथ** देखने को मिल सकती है। निवेशक नतीजों के साथ-साथ कमाई के अनुमानों में होने वाले बदलावों पर भी ध्यान देंगे।

FCNR इनफ्लो में बंपर उछाल की उम्मीद

फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) डिपॉजिट स्कीम में आने वाले पैसे का आंकड़ा $50 अरब के पार जा सकता है। एक्सिस बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट और एक्सिस कैपिटल के ग्लोबल रिसर्च हेड, नीलकंठ मिश्रा ने कहा है कि इन डिपॉजिट स्कीम्स की मांग काफी मजबूत बनी हुई है, जिससे कुल इनफ्लो उम्मीद से ज़्यादा हो सकता है।

भारतीय कंपनियों की कमाई का आउटलुक

आने वाले नतीजों के सीजन में कॉरपोरेट इंडिया से डबल-डिजिट प्रॉफिट ग्रोथ की उम्मीद है। बैंकिंग सेक्टर में बढ़ी हुई क्रेडिट ग्रोथ और एक्सपोर्टर्स के लिए कमजोर होते रुपये का फायदा इस अनुमान की मुख्य वजह है। एक्सिस कैपिटल के अनुसार, बैंकों की कमाई 12% से ज़्यादा बढ़ सकती है। हालांकि, सभी सेक्टर्स में यह ग्रोथ एक समान नहीं होगी। कुछ इंडस्ट्रीज़ इनपुट कॉस्ट बढ़ने के चलते मार्जिन पर दबाव झेल रही हैं, इसलिए नतीजों के दौरान कंपनियों की ऑपरेशनल एफिशिएंसी निवेशकों के लिए अहम होगी।

नतीजों पर निवेशकों का फोकस

नीलकंठ मिश्रा के अनुसार, निवेशक सिर्फ घोषित नतीजों से आगे बढ़कर कमाई के अनुमानों में होने वाले बदलावों (Earnings Revisions) पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में प्रॉफिट एस्टीमेट्स में की गई कटौती की रफ्तार अब धीमी पड़ती दिख रही है। जैसे-जैसे जून तिमाही के नतीजे आएंगे, मार्केट में ऊपरी संशोधनों (Upward Revisions) का दौर शुरू हो सकता है, जो शेयर की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।

ग्लोबल फैक्टर और फॉरेन इन्वेस्टमेंट

घरेलू स्तर पर तस्वीर अच्छी दिखने के बावजूद, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की तरफ से तुरंत बड़ी वापसी की उम्मीद कम है। ग्लोबल अनिश्चितता, मज़बूत होते अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव की वजह से इमर्जिंग मार्केट्स, सुरक्षित निवेश की तुलना में कम आकर्षक लग रहे हैं। भारत एक आर्थिक आउटलायर (Economic Outlier) होने के बावजूद, इन ग्लोबल मैक्रोइकोनॉमिक फैक्टर से अछूता नहीं रहेगा। इसके अलावा, आईटी सर्विसेज सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इंटीग्रेशन एक लॉन्ग-टर्म थीम है, जिसे इंडस्ट्री के लिए तत्काल खतरे की बजाय एक स्ट्रक्चरल बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

कंजम्पशन और डोमेस्टिक फ्लोज़

आने वाले समय में, कंजम्पशन (Consumption) और रियल एस्टेट (Real Estate) अगले साल के लिए ग्रोथ के संभावित थीम्स के रूप में उभर रहे हैं। अगले पे कमीशन (Pay Commission) से जुड़ी उम्मीदें खर्चों को बढ़ा सकती हैं, जिससे ऑटोमोबाइल और हाउसिंग जैसे सेक्टर्स की मांग को सपोर्ट मिलेगा। भारतीय इक्विटी मार्केट्स में ग्रोथ अब केवल टैक्स फायदों या FIIs पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह डोमेस्टिक हाउसहोल्ड सेविंग्स, खासकर सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्स (SIPs) और म्यूचुअल फंड्स के ज़रिए बढ़ रही है। निवेशकों को नतीजों के दौरान कंपनियों की कमेंट्री पर नज़र रखनी चाहिए, ताकि वे मार्जिन ट्रेंड्स और भविष्य की मांग के बारे में जानकारी हासिल कर सकें।

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