FCNR इनफ्लो से बैंकों को राहत! Q2 FY27 में CD इश्यूएंस घटने के आसार

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AuthorMehul Desai|Published at:
FCNR इनफ्लो से बैंकों को राहत! Q2 FY27 में CD इश्यूएंस घटने के आसार

फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भारतीय बैंकों को फंड जुटाने के लिए सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट्स (CDs) पर कम निर्भर रहना पड़ सकता है। ऐसा फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (FCNR) डिपॉजिट्स में आने वाले संभावित उछाल के कारण हो सकता है।

FCNR इनफ्लो का असर

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुताबिक, FCNR डिपॉजिट्स से बैंकों को मिलने वाला फंड, होलसेल मार्केट से उधार लेने की तुलना में ज्यादा स्थिर होता है। इस वजह से, भले ही बैंकिंग सिस्टम में फंड की मांग मजबूत बनी हुई हो, लेकिन FCNR डिपॉजिट्स में बढ़ोतरी से बैंकों की CDs जारी करने की जरूरत कम हो सकती है।

CD मार्केट का हाल

हाल ही में, जून 2026 में बैंकों ने CDs का इश्यूएंस काफी बढ़ा दिया था, जो पिछले महीने के ₹1.1 लाख करोड़ से बढ़कर ₹1.8 लाख करोड़ हो गया था। इसका मुख्य कारण पब्लिक सेक्टर बैंकों की लिक्विडिटी मैनेजमेंट और फंड की जरूरतें थीं। जून में बड़ी मात्रा में CDs मैच्योर (mature) हो रही थीं, जिन्हें रिफाइनेंस करने की जरूरत पड़ी। अब जब यह दबाव कम हो रहा है, तो उम्मीद है कि जून के स्तर से इश्यूएंस कम होगा।

मैच्योरिटी शेड्यूल और कंसंट्रेशन

आने वाले महीनों में, यानी जुलाई से सितंबर 2026 के बीच, ₹3.4 लाख करोड़ की CDs मैच्योर होंगी। इनमें से ₹50,000 करोड़ जुलाई में, ₹1.14 लाख करोड़ अगस्त में और ₹1.7 लाख करोड़ सितंबर में मैच्योर होंगी। इन मैच्योर होने वाले इंस्ट्रूमेंट्स में 56% पब्लिक सेक्टर बैंकों के हैं, जबकि प्राइवेट सेक्टर बैंकों का हिस्सा 42% है।

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि CDs मार्केट में कुछ बड़े बैंक ही हावी हैं। टॉप 5 इश्यूअर्स के पास मौजूदा समय में कुल आउटस्टैंडिंग CDs का करीब 63% हिस्सा है। इन बड़े बैंकों की फंड की लागत और लिक्विडिटी मैनेजमेंट की स्ट्रेटेजी अक्सर पूरे बैंकिंग सेक्टर की दिशा तय करती है।

निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

FCNR इनफ्लो से बैंकों को एक सहारा जरूर मिलेगा, लेकिन बैंक के प्रॉफिट मार्जिन की सेहत क्रेडिट ग्रोथ और फंड की लागत के बीच संतुलन पर निर्भर करेगी। निवेशकों को यह देखना होगा कि बैंक रिटेल या फॉरेन करेंसी डिपॉजिट्स की ओर कितना बढ़ पाते हैं, क्योंकि ये आमतौर पर होलसेल CDs से ज्यादा स्थिर माने जाते हैं। आने वाले महीनों में डिपॉजिट्स जुटाने की रफ्तार और CDs के वास्तविक इश्यूएंस वॉल्यूम पर नजर रखना, बड़े बैंकों की इंटरेस्ट कॉस्ट और लिक्विडिटी पोजीशन को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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