ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) आज अपना 5वां बैंकिंग और बीमा समिट आयोजित कर रहा है। इस खास इवेंट में व्हीकल फाइनेंस के बदलते परिदृश्य पर चर्चा की जाएगी, खासकर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) के लिए खास लेंडिंग मॉडल और डिजिटल सप्लाई-चेन फाइनेंसिंग पर जोर दिया जाएगा।
ऑटो सेक्टर में फाइनेंस की जरूरतें
Federation of Automobile Dealers Associations (FADA) की ओर से आयोजित 5वें बैंकिंग और बीमा समिट में ऑटोमोटिव रिटेल सेक्टर के लीडर्स इकट्ठा हुए हैं। इस मीटिंग का मकसद बैंकिंग, NBFCs और बीमा कंपनियों के साथ मिलकर उस फाइनेंशिंग सिस्टम को बेहतर बनाना है जो इस साल 30 मिलियन व्हीकल बिक्री के आंकड़े को पार करने की उम्मीद है।
हाल के आंकड़ों के मुताबिक, व्हीकल फाइनेंसिंग मार्केट का साइज बढ़कर ₹2.65 लाख करोड़ होने का अनुमान है, जो पिछले साल ₹2.4 लाख करोड़ था। वहीं, मोटर इंश्योरेंस मार्केट भी लगभग ₹1.25 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। डीलर्स इन फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के मुख्य डिस्ट्रीब्यूशन चैनल हैं, इसलिए यह समिट इन पार्टनर्शिप की एफिशिएंसी पर फोकस कर रहा है।
डीलर फंडिंग और EV मॉडल्स में बदलाव
डीलर फाइनेंसिंग में हो रहे बदलावों पर भी खास चर्चा की जा रही है। जैसे-जैसे इन्वेंटरी मैनेजमेंट (inventory management) और महत्वपूर्ण होता जा रहा है, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस डिजिटल सप्लाई-चेन फाइनेंसिंग (digital supply-chain finance) की ओर बढ़ रहे हैं। इसका फोकस पारंपरिक इन्वेंटरी फंडिंग के बजाय स्टॉक के रोटेशन पर है, जिससे डीलर्स के लिए कैपिटल एफिशिएंसी (capital efficiency) बेहतर हो सके।
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) फाइनेंसिंग एक अहम मुद्दा बना हुआ है, क्योंकि इस इंडस्ट्री में बैटरी वैल्यूएशन (battery valuation) और रेसिडुअल रिस्क (residual risk) जैसी अनोखी चुनौतियां हैं। उम्मीद है कि 'Battery-as-a-Service' जैसे खास मॉडल्स पर चर्चा होगी, जहां बैटरी को व्हीकल से अलग लीज या फाइनेंस किया जाएगा। यह लेंडर्स के लिए बहुत जरूरी है ताकि वे बैटरी टेक्नोलॉजी के डेप्रिसिएशन (depreciation) और लॉन्ग-टर्म लाइफ को ध्यान में रखते हुए नए अंडरराइटिंग स्टैंडर्ड्स (underwriting standards) विकसित कर सकें।
डिजिटलाइजेशन और इंश्योरेंस के ट्रेंड्स
मोटर इंश्योरेंस डीलर्स के लिए एक महत्वपूर्ण रेवेन्यू स्ट्रीम बना हुआ है, और यह सेक्टर नए डिजिटल टूल्स को अपना रहा है। इंस्टेंट क्रेडिट असेसमेंट (instant credit assessments) और ऑटोमेटेड अंडरराइटिंग (automated underwriting) के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल आम होता जा रहा है, जिसका मकसद व्हीकल सेलेक्शन से लेकर लोन अप्रूवल तक के समय को कम करना है। इसके अलावा, इंश्योरर्स कस्टमर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए एक्सटेंडेड वारंटी (extended warranties) और जीरो-डेप्रिसिएशन कवर (zero-depreciation covers) जैसे वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स को बढ़ावा दे रहे हैं।
इस समिट में Axis Bank, Yes Bank, AU Small Finance Bank, Mahindra Finance और Tata Capital जैसे बड़े फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के साथ ICICI Lombard और SBI General Insurance जैसे इंश्योरेंस प्रोवाइडर्स भी शामिल हैं। इन सभी का मुख्य लक्ष्य ऐसी स्ट्रेटेजीज पर सहमत होना है जो फाइनेंसिंग और इंश्योरेंस को कस्टमर बाइंग प्रोसेस (customer buying process) में और बेहतर तरीके से इंटीग्रेट कर सकें। इन्वेस्टर्स आगे की उन अपडेट्स पर नजर रख सकते हैं जिनसे डीलर्स के प्रॉफिट पर और EV-स्पेशिफिक फाइनेंसिंग प्रोडक्ट्स के पेनिट्रेशन रेट पर असर पड़ने की उम्मीद है।
