IndusInd Bank पर ₹70 करोड़ का केस! पूर्व CFO ने लगाए गलत तरीके से निकालने के आरोप

BANKINGFINANCE
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
IndusInd Bank पर ₹70 करोड़ का केस! पूर्व CFO ने लगाए गलत तरीके से निकालने के आरोप
Overview

IndusInd Bank के निवेशकों के लिए एक बड़ी खबर आई है। बैंक के पूर्व चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) Gobind Jain ने ₹70 करोड़ का एक बड़ा मुकदमा दायर किया है। उनका आरोप है कि उन्हें गलत तरीके से बैंक से निकाला गया है और यह पूरी प्रक्रिया अनुचित थी।

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पूर्व CFO का बैंक पर ₹70 करोड़ का मुकदमा

IndusInd Bank को अपने पूर्व चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO), Gobind Jain की ओर से एक बड़े मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है। Gobind Jain ने बैंक से ₹70 करोड़ की क्षतिपूर्ति और पद पर बहाली की मांग की है। बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर याचिका में Jain का दावा है कि उन्हें गैर-कानूनी तरीके से बर्खास्त (terminate) किया गया, जो उनके कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन था और बिना किसी उचित प्रक्रिया या जांच के हुआ। उन्होंने अपनी सैलरी, बोनस और स्टॉक ऑप्शन में हुए नुकसान के लिए करीब ₹20 करोड़ मांगे हैं, जबकि अपनी प्रतिष्ठा को हुई क्षति और मानसिक तनाव के लिए अतिरिक्त ₹50 करोड़ की मांग की है। इस मामले में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भी पक्षकार बनाया गया है।

पुराने गवर्नेंस मुद्दे फिर उभरे

यह मुकदमा ऐसे समय में आया है जब IndusInd Bank पहले से ही अपने पिछले कुछ गवर्नेंस (governance) और अकाउंटिंग (accounting) से जुड़े मुद्दों के कारण जांच के दायरे में है। इसी साल की शुरुआत में, बैंक के शेयर 27% से अधिक गिरे थे जब उसने फॉरेक्स डेरिवेटिव ट्रांज़ैक्शन्स (forex derivative transactions) में ₹1,577 करोड़ की एक अकाउंटिंग गड़बड़ी का खुलासा किया था। इसके चलते तत्कालीन CEO Sumant Kathpalia और डेप्युटी CEO Arun Khurana को इस्तीफा देना पड़ा था। RBI ने Kathpalia को केवल एक साल का एक्सटेंशन ही दिया था। इसके अलावा, EY द्वारा हाल ही में की गई एक ऑडिट में माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो में ₹600 करोड़ की विसंगति की जांच चल रही है। हाल ही में प्रमोटरों ने रीफाइनेंसिंग के लिए 6.45% शेयर गिरवी रखे हैं, जिसने और भी अधिक जांच को आमंत्रित किया है।

वैल्यूएशन को लेकर बढ़ी चिंता

IndusInd Bank का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (market capitalization) करीब ₹71,000 करोड़ है। हालांकि, इसके वैल्यूएशन मैट्रिक्स (valuation metrics) चिंताजनक लग रहे हैं। पिछले बारह महीनों (trailing twelve months) पर आधारित इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो लगभग 80.01-80.51 है, जो इसके अपने ऐतिहासिक आंकड़ों और ज्यादातर प्रतिस्पर्धियों से काफी ऊपर है। वहीं, इसका रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) काफी कम, केवल 1.36% और 4.17% के स्तर पर है। स्टॉक फिलहाल करीब ₹913.90 पर ट्रेड कर रहा है, जो एक साल में केवल 7.14% ही बढ़ा है, यह दर्शाता है कि हाई P/E के बावजूद निवेशक रिटर्न कमजोर रहा है। इसका 52-हफ्ते का उच्चतम स्तर ₹968.85 और निम्नतम स्तर ₹710.60 रहा है।

इंडस्ट्री से तुलना और एनालिस्ट की राय

जहां भारतीय बैंकिंग सेक्टर जीडीपी ग्रोथ (GDP growth) के कारण मजबूत दिख रहा है, वहीं IndusInd Bank अपने वैल्यूएशन और गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं के चलते अलग-थलग पड़ रहा है। HDFC Bank और ICICI Bank जैसे इसके प्रतिस्पर्धियों के वैल्यूएशन और गवर्नेंस रिकॉर्ड आमतौर पर बेहतर माने जाते हैं। HDFC Securities जैसे कुछ एनालिस्ट्स (analysts) ने 'Reduce' रेटिंग के साथ ₹760 का टारगेट प्राइस दिया है, जो मौजूदा स्तरों से काफी कम है। उनका मानना है कि बैंक का डिपॉजिट बिजनेस कमजोर है और अनसिक्योर्ड लोन (unsecured loan) पोर्टफोलियो में भी समस्याएं हैं। ब्रोकरेज फर्म Nuvama Institutional Equities ने ₹900 के टारगेट के साथ 'HOLD' की सलाह दी है, जबकि Jefferies ₹1,100 के टारगेट के साथ 'Buy' रेटिंग दे रहा है। बैंक का मैनेजमेंट FY27 तक ROA को 1% तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है, जिसके लिए बड़े सुधार की आवश्यकता होगी।

जोखिम और भविष्य की राह

पूर्व CFO द्वारा ₹70 करोड़ का यह मुकदमा, पिछले अकाउंटिंग स्कैंडल और मैनेजमेंट में हुए बदलावों के साथ मिलकर, IndusInd Bank की गवर्नेंस प्रोफाइल पर सवालिया निशान लगाता है। 80 के आसपास का हाई P/E और कम ROE, यह संकेत देता है कि बाजार शायद बैंक को उसकी कमाई और स्थिरता की तुलना में अधिक महत्व दे रहा है। प्रमोटरों द्वारा रीफाइनेंसिंग के लिए शेयर गिरवी रखना भी इसके कैपिटल स्ट्रक्चर (capital structure) और कर्ज को लेकर कुछ चिंताएं बढ़ा रहा है।

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