Equitas SFB का बड़ा फैसला: यूनिवर्सल बैंक लाइसेंस के लिए अभी नहीं करेंगे अप्लाई, जानिए क्या है वजह

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AuthorAditya Rao|Published at:
Equitas SFB का बड़ा फैसला: यूनिवर्सल बैंक लाइसेंस के लिए अभी नहीं करेंगे अप्लाई, जानिए क्या है वजह

Equitas Small Finance Bank ने यूनिवर्सल बैंक बनने की अपनी योजना को फिलहाल टाल दिया है। कंपनी का लक्ष्य है कि वह रेगुलेटरी मानकों पर अपनी अर्जी को पूरी तरह से खरा उतारे। इसके लिए मैनेजमेंट Jana और Ujjivan जैसे बैंकों की अर्जी के खारिज होने के मामलों का अध्ययन कर रहा है। ऐसा होने पर बैंक के कैपिटल की जरूरतें कम हो सकती हैं और लोन देने के नियम भी आसान हो सकते हैं।

Equitas Small Finance Bank ने यूनिवर्सल बैंक बनने की अपनी योजना को लेकर एक सधा हुआ रवैया अपनाने का फैसला किया है। कंपनी ने तेजी से आगे बढ़ने के बजाय रेगुलेटरी नियमों के साथ तालमेल बिठाने को प्राथमिकता दी है। हालांकि बैंक ने खुद को यूनिवर्सल बैंक के लिए योग्य पाया है, लेकिन मैनेजमेंट अन्य स्मॉल फाइनेंस बैंकों के अनुभवों पर बारीकी से गौर कर रहा है। इसका मकसद यह समझना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अतीत में इसी तरह के आवेदनों को क्यों खारिज किया था।

साथियों से सीख

बैंक के मैनेजमेंट ने बताया कि हाल ही में Jana Small Finance Bank और Ujjivan Small Finance Bank को तब झटका लगा जब रेगुलेटर ने उनके यूनिवर्सल बैंक लाइसेंस के आवेदनों को वापस भेज दिया। हालांकि Jana के आवेदन के खारिज होने के कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किए गए, लेकिन Ujjivan को RBI द्वारा कथित तौर पर अपनी लोन बुक को और विविध बनाने की सलाह दी गई थी। इन नतीजों को देखकर Equitas अपनी रणनीति को और बेहतर बनाना चाहता है ताकि उसका अंतिम सबमिशन मजबूत हो और सभी रेगुलेटरी उम्मीदों पर खरा उतरे, जिससे खारिज होने का जोखिम कम हो सके।

यूनिवर्सल बैंकिंग स्टेटस का असर

AU Small Finance Bank की तरह यूनिवर्सल बैंक लाइसेंस में बदलने से बैंक के संचालन प्रोफाइल में कई संरचनात्मक फायदे हो सकते हैं। वर्तमान में, स्मॉल फाइनेंस बैंकों के लिए प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (Priority Sector Lending) का लक्ष्य 60% है, जो यूनिवर्सल बैंक लाइसेंस के तहत घटकर 40% हो जाएगा। इसके अलावा, बैंक को अब ₹25 लाख से कम के लोन की 50% लोन पोर्टफोलियो की आवश्यकता नहीं होगी। इन बदलावों से लोन वितरण और कैपिटल डिप्लॉयमेंट (capital deployment) में अधिक लचीलापन आ सकता है।

इसके अतिरिक्त, रेगुलेटरी कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (Capital Adequacy Ratio) की आवश्यकता 15% से घटकर 11.5% हो सकती है। कैपिटल नॉर्म्स (capital norms) में यह बदलाव बैंक को अपने बैलेंस शीट को अधिक कुशलता से प्रबंधित करने की क्षमता दे सकता है। स्मॉल बैंक के दर्जे को हटाने से कुछ ग्राहक वर्गों के बीच जोखिम की धारणा को संभावित रूप से कम करके डिपॉजिट मोबिलाइजेशन (deposit mobilization) में भी मदद मिल सकती है।

वित्तीय संदर्भ और अगले कदम

Equitas इन प्रदर्शन बेंचमार्क को पूरा करने के बाद इस बदलाव के लिए योग्य हुआ था, जिसमें लगातार दो वर्षों तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Gross Non-Performing Assets) को 3% से नीचे और नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Net Non-Performing Assets) को 1% से नीचे बनाए रखना शामिल है। फाइनेंशियल ईयर 2026 के अंत तक, बैंक ने पिछले वर्ष के ₹147 करोड़ की तुलना में ₹103 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। इसका कैपिटल बेस वर्तमान में ₹1,144 करोड़ है, जो आवेदन के लिए नेट वर्थ (Net Worth) मानदंडों को पूरा करता है।

निवेशकों को लोन पोर्टफोलियो के विविधीकरण (diversification) के संबंध में बैंक के भविष्य के संचार पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यह साथियों के लिए रेगुलेटरी जांच का एक प्रमुख क्षेत्र रहा है। बैंक ने कहा है कि इस बदलाव के लिए कोई तत्काल समय-सीमा नहीं है, जिससे यह संकेत मिलता है कि आवेदन का समय आंतरिक तैयारी और रेगुलेटर के साथ चल रही बातचीत पर निर्भर रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.