₹120 करोड़ जुटाएगी कंपनी, ₹1 में शेयर
Enbee Trade and Finance के बोर्ड ने ₹120.05 करोड़ के इस बड़े राइट्स इश्यू को मंजूरी दे दी है। कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों को ₹1 प्रति शेयर की बेहद कम कीमत पर ये नए शेयर जारी करेगी। यह ऑफर 21:10 के रेशियो में होगा, यानी हर 10 मौजूदा शेयरों पर 21 नए शेयर खरीदने का मौका मिलेगा।
इस राइट्स इश्यू के लिए 4 मार्च 2026 को रिकॉर्ड डेट (Record Date) तय किया गया है। जो शेयरधारक इस तारीख तक कंपनी के शेयर रखेंगे, वे इस इश्यू के लिए पात्र होंगे। यह इश्यू 12 मार्च 2026 से 20 मार्च 2026 तक खुला रहेगा।
क्यों उठाया जा रहा है ये कदम?
कंपनी इस इश्यू के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और अपने ऑपरेशंस (Operations) या ग्रोथ प्लान्स (Growth Plans) को फंड करने के लिए करेगी। यह कदम NBFC कंपनी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे उसका बैलेंस शीट (Balance Sheet) मजबूत हो सकता है और विस्तार के अवसर खुल सकते हैं।
शेयरधारकों के लिए क्या है मायने?
यह राइट्स इश्यू कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों के लिए मिली-जुली खबर है। एक ओर, जहां शेयरधारकों को कम कीमत पर नए शेयर खरीदने का मौका मिलेगा, वहीं दूसरी ओर, इस इश्यू के पूरी तरह सब्सक्राइब (Subscribe) होने पर कंपनी के कुल शेयरों की संख्या लगभग 57.17 करोड़ से बढ़कर 177.22 करोड़ से अधिक हो जाएगी। यानी शेयरों की संख्या तीन गुना से ज्यादा बढ़ जाएगी।
इससे प्रति शेयर आय (EPS - Earnings Per Share) पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, अगर कंपनी का मुनाफा शेयरों की संख्या के हिसाब से तेजी से नहीं बढ़ता है। शेयरधारकों को यह तय करना होगा कि वे अपने हिस्सेदारी (Stake) को बनाए रखने के लिए राइट्स इश्यू में भाग लें या नहीं।
कंपनी की वित्तीय स्थिति और चुनौतियां
Enbee Trade and Finance एक RBI-रजिस्टर्ड NBFC है जो 1985 से काम कर रही है। कंपनी ने हाल ही में Q2 FY2026 में अपने नेट प्रॉफिट में 78% की बढ़ोतरी दर्ज की है और पिछले फाइनेंशियल ईयर में रेवेन्यू (Revenue) में भी अच्छी ग्रोथ दिखाई है।
हालांकि, कंपनी के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां भी हैं। इसके बैलेंस शीट को कमजोर माना जाता है, डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) 63.9% है, और ऑपरेटिंग कैश फ्लो (Operating Cash Flow) नकारात्मक (Negative) है। पिछले एक साल में शेयर की कीमत में 56% से ज्यादा की गिरावट भी आई है। कंपनी और उसके प्रमोटर्स (Promoters) का SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) के साथ भी पुराना इतिहास रहा है, जिसमें 2017 में एक ओपन ऑफर (Open Offer) में देरी के लिए जुर्माना भी लगा था।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि शेयरधारक इस राइट्स इश्यू में कितना हिस्सा लेते हैं। साथ ही, कंपनी जुटाए गए ₹120.05 करोड़ का इस्तेमाल कैसे करती है और इसका कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर क्या असर पड़ता है, यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा।