Embassy Office Parks REIT ने एक यूरोपीय बैंक से **₹1,000 करोड़** का फंड जुटाया है। यह भारत का पहला ऐसा REIT बन गया है जिसने RBI के नए नियमों के तहत सीधे बैंक फाइनेंसिंग का रास्ता चुना है, जो इसे पारंपरिक बॉन्ड मार्केट से हटकर फंडिंग का नया विकल्प देता है।
बैंक फंडिंग से बदली रणनीति
भारतीय रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट सेक्टर के लिए यह एक मील का पत्थर है। पहली बार किसी कमर्शियल बैंक ने ट्रस्ट-लेवल पर डायरेक्ट फाइनेंसिंग की है, जो जून 2026 में RBI द्वारा जारी किए गए नए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के बाद संभव हुआ है। कंपनी ने 3 साल के लिए फ्लोटिंग-रेट नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर जारी किए हैं।
ब्याज दर का गणित
अब तक REITs मुख्य रूप से म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस कंपनियों जैसे निवेशकों पर निर्भर थे, लेकिन Embassy REIT ने अब बैंकिंग सेक्टर में कदम रख दिया है। इस डील की ब्याज दर 3-महीने के MIBOR OIS बेंचमार्क से जुड़ी है, जिसमें 150 बेसिस पॉइंट्स का स्प्रेड जोड़ा गया है। फिलहाल, इसका कूपन रेट 6.97% तय किया गया है। चूंकि यह एक फ्लोटिंग रेट है, इसलिए ब्याज दर हर तिमाही में मार्केट बेंचमार्क के आधार पर बदलती रहेगी।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
यह कदम कंपनी की बोरिंग सोर्स को डाइवर्सिफाई करने की कोशिश को दर्शाता है। हालांकि, फ्लोटिंग रेट स्ट्रक्चर के साथ अब 'इंटरेस्ट रेट रिस्क' भी जुड़ गया है। अगर मार्केट बेंचमार्क ऊपर जाते हैं, तो कर्ज चुकाने की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर कैश फ्लो पर पड़ सकता है।
Embassy REIT का पोर्टफोलियो 5.2 करोड़ स्क्वायर फीट से ज्यादा का है, जिसमें बेंगलुरु, मुंबई, पुणे, चेन्नई और दिल्ली-NCR जैसे प्रमुख शहरों में 14 ऑफिस पार्क्स शामिल हैं। भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी कैसे फिक्स्ड-रेट बॉन्ड और बैंक लोंस के बीच बैलेंस बनाकर चलती है।
