एजुकेशन लोन लेते समय सिर्फ ब्याज दर (Interest Rate) देखना काफी नहीं है। लंबी अवधि के लिए पैसों का बोझ कम करने और बेहतर सुविधा पाने के लिए रिपेमेंट फ्लेक्सिबिलिटी, प्रोसेसिंग फीस और मोरेटोरियम पीरियड जैसी जरूरी बातों को समझना बहुत अहम है।
कॉलेज में एडमिशन मिलना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन उस पढ़ाई का खर्च उठाना एक ऐसी चुनौती है जिसके लिए अच्छी प्लानिंग की जरूरत होती है। आजकल कई बैंक और NBFCs (Non-Banking Financial Companies) एजुकेशन लोन की स्कीम्स ऑफर कर रहे हैं। ऐसे में, सही लोन चुनना उतना ही जरूरी है जितना कि सही कोर्स चुनना। अगर आपने इस स्टेज पर सही रिसर्च नहीं की, तो आपको उम्मीद से ज्यादा महंगा पड़ सकता है या पढ़ाई के बाद रिपेमेंट में दिक्कतें आ सकती हैं।
सिर्फ ब्याज दर (Interest Rate) से आगे देखें
ब्याज दरें सबसे ऊपर दिखती हैं, लेकिन ये पूरी कहानी नहीं बतातीं। एक जैसी ब्याज दर वाले दो लोन्स में प्रोसेसिंग फीस, डॉक्यूमेंटेशन चार्ज और इंश्योरेंस प्रीमियम जैसी अतिरिक्त लागतों के कारण बड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए, निवेशकों और स्टूडेंट्स को एक ऐसी विस्तृत 'सेंशन लेटर' (Sanction Letter) मांगनी चाहिए जिसमें लोन से जुड़ी हर लागत का ब्योरा हो। लंबे टेन्योर (Tenure) पर ये अतिरिक्त चार्जेस उधार लेने की असल लागत को काफी बढ़ा देते हैं।
मोरेटोरियम (Moratorium) और इंटरेस्ट एक्रूअल (Interest Accrual) को समझें
ज्यादातर एजुकेशन लोन में एक मोरेटोरियम पीरियड मिलता है। यह वो समय होता है जब आप अपनी पढ़ाई के दौरान और उसके तुरंत बाद की ग्रेस पीरियड में लोन की प्रिंसिपल अमाउंट (Principal Amount) का भुगतान नहीं करते। लेकिन, यह समझना बेहद जरूरी है कि इस दौरान ब्याज (Interest) कैसे कैलकुलेट हो रहा है। कुछ लेंडर (Lender) सिर्फ सिंपल इंटरेस्ट (Simple Interest) लेते हैं, जबकि कुछ मोरेटोरियम के दौरान कंपाउंड इंटरेस्ट (Compound Interest) लगा देते हैं। अगर इंटरेस्ट कंपाउंड हो रहा है, तो असल रिपेमेंट शुरू होने पर आपकी कुल देनदारी काफी बढ़ जाएगी। यह जानना कि क्या लेंडर पढ़ाई के दौरान आंशिक ब्याज भुगतान (Partial Interest Payment) की अनुमति देता है, आपके कुल कर्ज को कम करने में मदद कर सकता है।
लाइफस्टाइल खर्चों से ज्यादा जरूरतों को प्राथमिकता दें
लोन की राशि कैलकुलेट करते समय, जरूरी एजुकेशनल खर्चों और लाइफस्टाइल पर होने वाले ऐच्छिक खर्चों के बीच फर्क करना महत्वपूर्ण है। ट्यूशन फीस, एग्जाम फीस और किताबें जैसी चीजें मुख्य जरूरतें हैं, जबकि रहने-खाने जैसे अन्य खर्चों का अनुमान बहुत सावधानी से लगाना चाहिए। जरूरत से ज्यादा उधार लेने पर कुल इंटरेस्ट लायबिलिटी (Interest Liability) बढ़ जाती है। चूंकि एजुकेशन लोन एक लंबी अवधि का कमिटमेंट (Commitment) है, इसलिए समझदारी से उधार लेने पर यह सुनिश्चित होता है कि करियर के शुरुआती वर्षों में, जब आय कम हो सकती है, तब भी कर्ज मैनेजेबल (Manageable) रहे।
भविष्य की क्रेडिट हेल्थ (Credit Health) पर असर
एजुकेशन लोन अक्सर छात्र का फॉर्मल क्रेडिट सिस्टम (Formal Credit System) के साथ पहला बड़ा इंटरेक्शन (Interaction) होता है। समय पर लोन चुकाने से एक पॉजिटिव क्रेडिट हिस्ट्री (Positive Credit History) बनती है, जो भविष्य की वित्तीय जरूरतों जैसे होम लोन या कार लोन के लिए जरूरी है। इसके विपरीत, डिफॉल्ट (Default) या लेट पेमेंट्स (Late Payments) छात्र और सह-आवेदक (Co-applicant) यानी माता-पिता के क्रेडिट स्कोर (Credit Score) पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। शुरुआत से ही एक व्यवस्थित रिपेमेंट प्लान (Repayment Plan) बनाना लंबी अवधि की वित्तीय सेहत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। अगला अहम कदम यह है कि किसी भी उधारकर्ता को कम से कम तीन अलग-अलग लेंडर्स की तुलना करनी चाहिए, और लोन की प्रीपेमेंट (Prepayment) और इंटरेस्ट रेट रीसेट (Interest Rate Reset) से संबंधित विशेष क्लॉजेज (Clauses) पर बारीकी से ध्यान देना चाहिए।
