मुनाफे में वापसी, लेकिन कर्ज़ की चिंताएं कायम
ESAF Small Finance Bank के लिए चौथी तिमाही नतीजों के लिहाज से अच्छी रही। बैंक ने ₹23.5 करोड़ का नेट प्रॉफिट (Net Profit) कमाया है, जो पिछले साल इसी अवधि में आए ₹183.2 करोड़ के भारी घाटे से एक बड़ी वापसी है। इस मुनाफे में मुख्य भूमिका नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) की रही, जो 19.2% बढ़कर ₹518 करोड़ हो गई। साथ ही, बैंक ने प्रोविजन्स (Provisions) और आकस्मिकताओं में भी कटौती की, जिससे बॉटमलाइन को मदद मिली। नतीजों के बाद, ESAF के शेयर में 2.01% की मामूली तेजी देखी गई और यह ₹26.39 पर बंद हुआ।
एसेट क्वालिटी पर बनी हुई है बड़ी चिंता
प्रॉफिट में वापसी के बावजूद, ESAF की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) यानी लोन की गुणवत्ता पर अभी भी सवाल बने हुए हैं। बैंक का नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) सुधरकर 1.77% हो गया है, जो पिछले 2.73% से बेहतर है। लेकिन, ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) अभी भी 5.41% पर काफी ऊंचे बने हुए हैं। यह आंकड़ा भारतीय अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के औसत 2.7% (मार्च 2025 तक) से काफी अधिक है।
अगर हम साथियों से तुलना करें, तो AU Small Finance Bank जैसी कंपनियां, जिनकी मार्केट कैप ₹40,000 करोड़ से ज्यादा है और P/E रेश्यो 20-23x के आसपास है, ESAF से कहीं बेहतर वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रही हैं। ESAF की मार्केट कैप लगभग ₹1,334 करोड़ ही है। CARE Ratings जैसी एजेंसियों ने 2025 के अंत में ESAF के लिए 'नेगेटिव' आउटलुक (Negative Outlook) जारी किया था, जिसकी वजह एसेट क्वालिटी का कमजोर होना और लगातार घाटा रहा है। स्मॉल फाइनेंस बैंक सेक्टर में अगले साल मार्च 2026 तक GNPA 3.7-3.9% रहने का अनुमान है, ऐसे में ESAF का मौजूदा आंकड़ा उससे काफी ऊपर है।
लगातार जोखिम और कॉम्पिटिशन का दबाव
बैंक के सामने स्मॉल फाइनेंस बैंक सेक्टर से जुड़े लगातार जोखिम बने हुए हैं, खासकर वोलेटाइल रिटेल और MSME सेगमेंट में। ESAF का 5.41% का ऊंचा GNPA रेश्यो और -21.34% का नेगेटिव रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) लोन बुक की क्वालिटी में अंदरूनी समस्याओं की ओर इशारा कर रहा है। बैंक का CASA रेश्यो (Customer Acquisition Cost Ratio) लगभग 24.8% है, जो बताता है कि यह महंगे टर्म डिपॉजिट पर ज्यादा निर्भर है। इससे नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margin) पर दबाव पड़ सकता है, खासकर उन प्रतिस्पर्धियों की तुलना में जिनके पास मजबूत डिपॉजिट बेस है।
जनवरी 2026 तक फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की हिस्सेदारी 0.27% से घटकर महज 0.01% रह गई है, जो आंतरराष्ट्रीय निवेशकों के भरोसे की कमी को दर्शाता है। CARE और Brickwork जैसी रेटिंग एजेंसियों ने ऐतिहासिक रूप से एसेट क्वालिटी और घाटे को लेकर चिंताएं जताई हैं। इसके अलावा, ESAF का एडवांसेज ग्रोथ रेट (Advances Growth Rate) पिछले 5 सालों में पहली बार साल-दर-साल नेगेटिव (नकारात्मक) रहा है, जो जोखिम को मैनेज करने के लिए रणनीतिक रूप से उधार कम करने का संकेत देता है।
आगे की राह: टिकाऊ रिकवरी की उम्मीद
ESAF मैनेजमेंट अगले फाइनेंशियल ईयर में ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) बढ़ाने और NPA को और कम करने पर फोकस करने की योजना बना रहा है। हालांकि बैंक ने तिमाही प्रॉफिट हासिल कर लिया है, लेकिन एसेट क्वालिटी को टिकाऊ ढंग से मजबूत करना और कॉम्पिटिटिव स्मॉल फाइनेंस बैंकिंग सेक्टर में बने रहना महत्वपूर्ण होगा। एनालिस्ट कवरेज की कमी को देखते हुए भविष्य के प्रदर्शन का अनुमान लगाना मुश्किल है, लेकिन पिछली नेगेटिव रेटिंग आउटलुक यह बताते हैं कि निवेशकों का भरोसा फिर से जीतना एक चुनौतीपूर्ण काम होगा।
