ERGO International के COO थियोडोरस कोकालस ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल HDFC ERGO का IPO लाने की कोई योजना नहीं है। कंपनी के पास पर्याप्त कैपिटल है और वे अपना ध्यान एआई (AI) और बेहतर अंडरराइटिंग के जरिए अपने कंबाइंड रेशियो को **80-85%** तक लाने पर लगा रहे हैं।
लिस्टिंग पर क्या है कंपनी का रुख?
ERGO International के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर थियोडोरस कोकालस ने उन चर्चाओं पर विराम लगा दिया है जिनमें HDFC ERGO के आईपीओ (IPO) की बात चल रही थी। कंपनी का कहना है कि उनके पास विकास के लिए पर्याप्त पूंजी मौजूद है, इसलिए फिलहाल उन्हें बाजार से फंड जुटाने की कोई जरूरत नहीं है। गौर करने वाली बात यह है कि यह ज्वाइंट वेंचर 18 साल पुराना है, जिसमें ERGO की 49% हिस्सेदारी है और HDFC के साथ उनका गठबंधन काफी मजबूत है।
कंबाइंड रेशियो पर फोकस
बीमा क्षेत्र में 'कंबाइंड रेशियो' कंपनी की सेहत का सबसे बड़ा पैमाना है। भारतीय इंश्योरेंस सेक्टर में इंडस्ट्री का औसत कंबाइंड रेशियो 110% से 115% के बीच रहता है। यानी कंपनियां अपनी प्रीमियम कमाई से ज्यादा दावों (Claims) के भुगतान में खर्च कर रही हैं। ERGO का लक्ष्य इसे घटाकर 80% से 85% के दायरे में लाना है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी दो मोर्चों पर काम कर रही है:
- अनुशासित अंडरराइटिंग: जोखिम को बेहतर तरीके से आंकना और पॉलिसी की सही कीमत तय करना।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): क्लेम प्रोसेस को तेज और ऑटोमेट करना ताकि ऑपरेटिंग खर्चों में बड़ी कटौती की जा सके।
रेगुलेटरी बदलावों पर राय
कंपनी ने भारतीय इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI द्वारा किए जा रहे सुधारों की सराहना की है, लेकिन साथ ही एक चिंता भी जताई है। कोकालस के मुताबिक, भारत में बदलावों की गति यूरोप के मुकाबले काफी तेज है। कंपनी ने सरकार से अपील की है कि भविष्य के नियमों और मैंडेट्स को लेकर थोड़ी और स्पष्टता और पूर्वानुमेयता (predictability) रखी जाए, जिससे कंपनियां अपने लॉन्ग-टर्म बिजनेस प्लान को बेहतर ढंग से लागू कर सकें।
