EPFO ने अप्रैल-जून तिमाही में शेयर बाजार में **₹17,000 करोड़** का निवेश किया है। इसके साथ ही संस्था अब रिस्की एसेट्स जैसे प्राइवेट इक्विटी और स्टार्टअप फंड्स में भी पैसा लगाने पर विचार कर रही है।
इक्विटी की ओर क्यों बढ़ा झुकाव?
रिटायरमेंट फंड मैनेजर EPFO अब केवल सुरक्षित सरकारी बॉन्ड्स तक सीमित नहीं रहना चाहता। महंगाई को मात देने वाले रिटर्न की तलाश में संस्था ने अप्रैल-जून 2026 की बाजार अस्थिरता का फायदा उठाया। अब संस्था का कुल इक्विटी एक्सपोजर 11.2% पर पहुंच गया है, जो कि ₹3.7 लाख करोड़ का है। कुल पोर्टफोलियो ₹33.2 लाख करोड़ का है, जिसे सरकार द्वारा तय की गई 15% की लिमिट के भीतर रखा गया है।
सुरक्षित निवेश पर भी नजर
सिर्फ शेयर ही नहीं, संस्था ने सुरक्षा का संतुलन भी बनाए रखा है। इसी तिमाही में ₹56,000 करोड़ लिक्विड डेट इंस्ट्रूमेंट्स में और ₹36,000 करोड़ लॉन्ग-टर्म सरकारी बॉन्ड्स में निवेश किए गए हैं।
रिस्की एसेट्स (AIF) में एंट्री की तैयारी
EPFO अब अपने पोर्टफोलियो को और विविधता देने के लिए नई राह तलाश रहा है। खबर है कि संस्था अपने सालाना इनफ्लो का 3% तक हिस्सा Alternative Investment Funds (AIF) में निवेश करने की योजना बना रही है। इसमें स्टार्टअप्स, प्राइवेट इक्विटी और रियल एस्टेट जैसे एसेट्स शामिल हैं। इस प्रस्ताव पर Central Board of Trustees (CBT) की मुहर नवंबर 2026 तक लगने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए जोखिम
यह कदम भले ही बेहतर रिटर्न की उम्मीद जगाता हो, लेकिन जोखिम भी बढ़ाता है। सरकारी बॉन्ड्स के मुकाबले स्टार्टअप्स और प्राइवेट इक्विटी में निवेश कहीं अधिक रिस्की और अनिश्चित होता है। निवेशकों को नवंबर में होने वाली बोर्ड मीटिंग पर खास नजर रखनी चाहिए, क्योंकि वहीं से तय होगा कि भविष्य में आपकी रिटायरमेंट बचत का कितना हिस्सा इन हाई-रिस्क एसेट्स में जाएगा।
