यह कदम मौजूदा 6.68% जैसी कम बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) के बीच बड़ा है, जो EPFO के लिए अपने सदस्यों को लगातार उच्च ब्याज दरें देने की चुनौती बढ़ा रहा है। वर्तमान में, EPFO अपने ₹31 लाख करोड़ के कॉर्पस (Corpus) का बड़ा हिस्सा सरकारी सिक्योरिटीज (Government Securities) और कॉर्पोरेट डेट (Corporate Debt) में निवेश करता है, जिसमें इक्विटी (Equity) का हिस्सा केवल 5-15% तक सीमित है, और यह मुख्य रूप से एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETFs) के माध्यम से होता है। पहली बार, EPFO का इक्विटी एक्सपोजर लगभग 10% तक पहुंचा है।
नई कमेटी उन क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं का पता लगाएगी जहां से बेहतर रिटर्न मिल सके, जैसे कि उभरते हुए सेक्टर्स (Emerging Sectors) - दुर्लभ पृथ्वी धातुएं (Rare Earths), रेलवे और रक्षा (Defense)। साथ ही, फैक्टर-बेस्ड इंडेक्स (Factor-based Indices) और अन्य अल्टरनेटिव स्ट्रैटेजी (Alternative Strategies) पर भी गौर किया जाएगा। यह कदम वैश्विक सॉवरेन वेल्थ फंड (Sovereign Wealth Funds) की रणनीति जैसा है, जो अक्सर अपने फंड का बड़ा हिस्सा (40-50% या अधिक) इक्विटी और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट्स में लगाते हैं। उदाहरण के लिए, मलेशिया का EPF अपने निवेश आय का 68% इक्विटी से प्राप्त करता है।
हालांकि, उच्च रिटर्न की चाहत में जोखिम भी बढ़ जाता है। दुर्लभ पृथ्वी धातुएं और रक्षा जैसे क्षेत्रों में अत्यधिक अस्थिरता (Volatility), भू-राजनीतिक संवेदनशीलता (Geopolitical Sensitivity), और नियामक अनिश्चितताएं (Regulatory Uncertainties) हो सकती हैं। रक्षा उद्योग बढ़ते वैश्विक तनाव से लाभान्वित हो सकता है, लेकिन इसमें भी चक्रीयता (Cyclicality) और सप्लाई चेन में बाधाओं का खतरा है।
EPFO का फंड पिछले पांच सालों में लगभग दोगुना होकर ₹24.75 ट्रिलियन हो गया है। इतनी बड़ी रकम को सीधे इक्विटी या नए सेक्टर्स में लगाना, जहां विशेषज्ञता की कमी हो सकती है, कैपिटल लॉस (Capital Loss) का जोखिम बढ़ा सकता है। फंड मैनेजरों के लिए परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव (Performance-linked Incentives) अत्यधिक जोखिम लेने के लिए प्रेरित कर सकते हैं, जिससे फंड के दीर्घकालिक पूंजी संरक्षण (Capital Preservation) के लक्ष्य से समझौता हो सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पहले भी EPFO को सलाह दी है कि वह अपने निवेश प्रबंधन और लेखांकन प्रथाओं (Accounting Practices) को बेहतर बनाए और आधुनिक पोर्टफोलियो प्रबंधन (Modern Portfolio Management) की ओर बढ़े। कमेटी की सिफारिशें EPFO के भविष्य के निवेश पथ को तय करेंगी। संगठन के सामने एक नाजुक संतुलन बनाने की चुनौती है: विकास के नए अवसरों का लाभ उठाना और साथ ही बढ़ते जोखिमों का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करना।