EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) और LIC (भारतीय जीवन बीमा निगम) के पास मार्च 2026 तक **₹16,600 करोड़** से ज़्यादा की रकम लावारिस या इनऑपरेटिव (inoperative) पड़ी हुई है। सरकार इन पैसों को सही मालिकों तक पहुंचाने के लिए खास प्रयास कर रही है।
Detailed Coverage
कौन से विभाग के पास कितना पैसा?
वित्त मंत्रालय ने खुलासा किया है कि EPFO और LIC के पास कुल मिलाकर ₹16,600 करोड़ से ज़्यादा की राशि लावारिस या इनऑपरेटिव फंड के तौर पर रखी हुई है। 31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, अकेले EPFO के इनऑपरेटिव खातों में ₹9,330.56 करोड़ हैं। वहीं, LIC के पास पॉलिसीधारकों के लावारिस फंड और उस पर मिले ब्याज के रूप में ₹7,318.50 करोड़ जमा हैं।
सरकारी कोशिशें और रिकवरी के उपाय
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 20 जुलाई 2026 को लोकसभा में बताया कि सरकार इन फंड्स को उनके सही मालिकों से जोड़ने के लिए जागरूकता अभियान चला रही है। LIC पॉलिसीधारकों के लिए, कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर एक खास सर्च पोर्टल समेत कई ट्रैकिंग सिस्टम लागू किए हैं। LIC एसएमएस अलर्ट, ब्रांच ऑफिस से सीधी बातचीत और अपने एजेंट्स व 'बीमा सखी' नेटवर्क के ज़रिए भी पॉलिसीधारकों से संपर्क करने की कोशिश कर रही है।
रेगुलेटरी नियम और फंड मैनेजमेंट
बीमा क्षेत्र के लिए, भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) लंबी अवधि के लावारिस पैसों के लिए खास नियम बनाता है। 19 जून 2024 को जारी IRDAI मास्टर सर्कुलर के मुताबिक, दस साल से ज़्यादा समय से लावारिस पड़े फंड को सीनियर सिटीजन वेलफेयर फंड (SCWF) में ट्रांसफर करना होता है। LIC को यह ट्रांसफर हर साल 1 मार्च से पहले करना होता है। EPFO की बात करें तो, श्रम और रोज़गार मंत्रालय का कहना है कि इनऑपरेटिव खातों के फंड को किसी और काम के लिए इस्तेमाल करने की कोई योजना नहीं है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि यह रकम खाताधारकों के लिए ही सुरक्षित रहे।
निवेशकों और पॉलिसीधारकों के लिए एक्शन
अगर आपको लगता है कि आपके या आपके किसी करीबी के पैसे इन संस्थानों में भूले हुए हैं, तो आधिकारिक चैनलों के ज़रिए अपनी स्थिति की जांच ज़रूर करें। EPF खातों के लिए, आप EPFO मेंबर पोर्टल पर जाकर अपना अकाउंट स्टेटस चेक कर सकते हैं। LIC पॉलिसियों के लिए, आधिकारिक वेबसाइट पर एक सर्च फैसिलिटी दी गई है जिससे आप लावारिस रकम का पता लगा सकते हैं। फंड को वापस पाने पर रेगुलेटरी फोकस को देखते हुए, यह सबसे अच्छा तरीका है कि आप समय रहते अपने पैसों की जांच कर लें, ताकि वे सीनियर सिटीजन वेलफेयर फंड में ट्रांसफर न हो जाएं या हमेशा के लिए इनऑपरेटिव न रह जाएं। सरकार की डिजिटल पारदर्शिता और आउटरीच पर लगातार ज़ोर देने से यह उम्मीद है कि भविष्य में फंड वापस पाने की प्रक्रिया और भी आसान हो सकती है।
