Enforcement Directorate (ED) ने **645 करोड़ रुपये** के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पंजाब और हरियाणा के **14 ठिकानों** पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। मामला IDFC First Bank के खातों के जरिए हरियाणा सरकार के पब्लिक फंड की हेराफेरी से जुड़ा है।
सरकारी फंड की हेराफेरी का खेल
जांच एजेंसियों का आरोप है कि हरियाणा सरकार के सरकारी खातों से निकाले गए पैसों को ज्वेलरी आउटलेट्स के जरिए घुमाया गया, ताकि उनके असली स्रोत को छिपाया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया में IDFC First Bank के खातों का इस्तेमाल हुआ। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि आखिर बैंक के इंटरनल सेफ्टी सिस्टम्स को चकमा देकर इतने बड़े ट्रांजेक्शंस को कैसे अंजाम दिया गया।
CBI की जांच और बड़े अधिकारियों पर आंच
यह केस केवल ED तक सीमित नहीं है, बल्कि Central Bureau of Investigation (CBI) भी समानांतर जांच कर रही है। CBI ने पंचकूला की अदालत में अपनी तीसरी चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें हरियाणा कैडर के कई IAS अधिकारियों के नाम संदिग्धों के तौर पर सामने आए हैं। यह मामला हरियाणा स्टेट विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो द्वारा दर्ज की गई FIR से शुरू हुआ था।
अब तक का एक्शन
अधिकारियों ने अब तक 14 अलग-अलग संस्थाओं के खिलाफ केस दर्ज किया है और 211 करोड़ रुपये की संपत्ति को अटैच कर लिया है। इस मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। बैंकिंग सेक्टर और निवेशकों के लिए यह खबर एक बड़ी चेतावनी है कि कैसे अनुपालन (Compliance) में कमी का फायदा उठाया जा सकता है। बाजार अब कोर्ट और जांच एजेंसियों के अगले कदमों पर कड़ी नजर बनाए हुए है।
