Kotak Bank के पूर्व एग्जीक्यूटिव पर ₹107 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप, ED ने दर्ज की चार्जशीट

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AuthorNeha Patil|Published at:
Kotak Bank के पूर्व एग्जीक्यूटिव पर ₹107 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप, ED ने दर्ज की चार्जशीट

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोटक महिंद्रा बैंक के एक पूर्व एग्जीक्यूटिव के खिलाफ ₹107 करोड़ की हेराफेरी के मामले में चार्जशीट दायर की है। यह पैसा पंचकूला नगर निगम का बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों ने इस मामले से जुड़े ₹131 करोड़ की संपत्ति भी कुर्क कर ली है।

कोटक महिंद्रा बैंक धोखाधड़ी का पूरा मामला

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोटक महिंद्रा बैंक के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (पूर्व) पुष्पेंद्र सिंह के खिलाफ ₹107 करोड़ से ज़्यादा के सरकारी फंड के गबन के आरोप में चार्जशीट दाखिल की है। यह पूरा मामला पंचकूला नगर निगम के पैसों की हेराफेरी से जुड़ा है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि यह धोखाधड़ी फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके अनधिकृत बैंक खाते खोलकर की गई थी। इन खातों से जुड़े मोबाइल नंबर और ईमेल एड्रेस को बदलकर, आरोपी ने बैंक के सामान्य आंतरिक वेरिफिकेशन और सुरक्षा प्रोटोकॉल को दरकिनार कर दिया। इसी का फायदा उठाकर, उन्होंने नगर निगम के वैध खातों से पैसा निकालकर अपने निजी खातों में ट्रांसफर कर लिया। यह भी पता चला है कि इस रैकेट में एक से ज़्यादा बैंक कर्मचारी शामिल थे, जिनमें पुष्पेंद्र सिंह की गिरफ्तारी 1 जून 2026 को हुई थी।

₹131 करोड़ की संपत्ति कुर्क

इस हेराफेरी के खुलासे के बाद, ED ने डूबे हुए सरकारी पैसों की रिकवरी के लिए ऐक्शन लिया है। एजेंसी ने आरोपियों से जुड़ी ₹131.13 करोड़ की संपत्ति को प्रोविजनली अटैच (कुर्क) कर लिया है। इस कुर्की में कई प्रॉपर्टीज़ और बैंक बैलेंस शामिल हैं। 30 जुलाई 2026 को दाखिल की गई चार्जशीट में कोटक महिंद्रा बैंक के अन्य कर्मचारियों, दिलीप राघव और सतीश कुमार के नाम भी सह-षड्यंत्रकारी के तौर पर सामने आए हैं।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

यह मामला वित्तीय सेवाओं में ऑपरेशनल रिस्क (Operational Risk) की ओर इशारा करता है। भले ही यह फ्रॉड एक खास ब्रांच और कुछ कर्मचारियों तक सीमित हो, लेकिन अंदरूनी कर्मचारियों की मिलीभगत से सुरक्षा उपायों को तोड़ना बैंक के लिए रेप्युटेशनल रिस्क (Reputational Risk) खड़ा करता है। इससे बैंक के इंटरनल ऑडिट सिस्टम और कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली धांधली को रोकने के लिए मौजूद कंट्रोल्स (Controls) की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

अब यह मामला कोर्ट में आगे बढ़ेगा। निवेशकों और बाजार के लिए यह देखना अहम होगा कि बैंक इस पर आगे क्या कदम उठाता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या और कड़े KYC और ऑथराइजेशन प्रोटोकॉल लागू करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.