European Central Bank (ECB) के पॉलिसीमेकर Primoz Dolenc ने सितंबर में ब्याज दरों को बढ़ाकर **2.5%** करने का संकेत दिया है। बढ़ती महंगाई और एनर्जी कॉस्ट को काबू करने के लिए यह कदम उठाया जा सकता है, जो भारतीय निवेशकों के लिए भी अहम है।
महंगाई पर लगाम की तैयारी
European Central Bank के गवर्निंग काउंसिल मेंबर Primoz Dolenc ने सितंबर 2026 में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का स्पष्ट समर्थन किया है। इसका मुख्य उद्देश्य मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण बढ़ी एनर्जी और फ्यूल की कीमतों से पैदा हुई महंगाई को नियंत्रित करना है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो डिपॉजिट फैसिलिटी रेट मौजूदा 2.25% से बढ़कर 2.50% हो जाएगा।
क्यों चिंतित हैं भारतीय निवेशक?
जब ECB जैसे बड़े सेंट्रल बैंक ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो दुनिया भर में लिक्विडिटी (Liquidity) कम हो जाती है। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार में आने वाले विदेशी निवेश (FII flow) पर पड़ सकता है। निवेशक अक्सर विकसित बाजारों को अधिक सुरक्षित मानकर वहां पूंजी शिफ्ट कर सकते हैं। इसके अलावा, ब्याज दरों के अंतर से यूरो और भारतीय रुपये की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
आगे की राह
फिलहाल मार्केट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की उम्मीद पहले से ही है, लेकिन सितंबर के बाद का रास्ता अभी स्पष्ट नहीं है। अधिकारी फिलहाल फ्लेक्सिबल रहना चाहते हैं और किसी भी बड़े ऐलान से पहले नए इकोनॉमिक डेटा का इंतजार कर रहे हैं। निवेशकों की नजर अब दिसंबर में आने वाले सेंट्रल बैंक के प्रोजेक्शंस पर होगी, जो भविष्य की पॉलिसी और ब्याज दरों की दिशा तय करेंगे।
