IDBI Bank के निजीकरण की प्रक्रिया मुश्किलों में फंसती दिख रही है। पूर्व नौकरशाह EAS Sarma ने KPMG और खरीदार Fairfax के बीच हितों के टकराव (Conflict of Interest) का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है। इस बड़े स्टेक सेल के साथ ही बैंक कर्मचारी भी हड़ताल पर हैं, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
सौदे पर क्यों उठ रहे सवाल?
पूर्व नौकरशाह EAS Sarma ने IDBI Bank के निजीकरण को लेकर सरकारी तंत्र पर सवाल उठाए हैं। यह मामला सरकार और LIC के 60.72% स्टेक की ₹52,878 करोड़ में बिक्री से जुड़ा है, जिसे 10955230 Canada Inc. (Fairfax Financial Holdings समर्थित) को बेचा जाना है।
मुख्य आपत्ति ट्रांजेक्शन एडवाइजर KPMG की भूमिका को लेकर है। आरोप है कि KPMG के IIFL Capital से पुराने संबंध रहे हैं और Fairfax की इसमें बड़ी हिस्सेदारी है, जिससे पूरी बिडिंग प्रोसेस की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। Sarma का तर्क है कि DIPAM ने खरीदार को चुनने से पहले पर्याप्त ड्यू डिलिजेंस नहीं किया।
बैंक की लिक्विडिटी का इस्तेमाल?
इस डील में वित्तीय संरचना भी चर्चा का विषय है। डेटा के मुताबिक, 30 जून 2026 तक बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) 26.92% था, जो रेगुलेटरी मानक 11.5% से काफी ज्यादा है। आलोचकों को डर है कि कहीं खरीदार बैंक की इसी अतिरिक्त पूंजी (Excess Capital) का उपयोग खरीद के लिए तो नहीं करेगा, जिससे सरकार का फिस्कल वैल्यू का उद्देश्य कमजोर पड़ सकता है।
हड़ताल और निवेशकों के लिए जोखिम
बैंक कर्मचारी यूनियनों ने 2 और 3 नवंबर 2026 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इस विरोध-प्रदर्शन से ऑपरेशनल कामकाज में रुकावट आने का खतरा है। हालांकि, सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया में सख्त ड्यू डिलिजेंस का पालन किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दूसरे दौर की बिडिंग में उम्मीद से ₹3,917 करोड़ ज्यादा वैल्यूएशन हासिल हुआ है।
अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार इन आरोपों का जवाब देती है और क्या कानूनी या संसदीय जांच का दायरा बढ़ता है।
