PSU Banks Merger: क्या सरकारी बैंकों का होगा विलय? EAC-PM के नए पेपर से मची हलचल

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AuthorNeha Patil|Published at:
PSU Banks Merger: क्या सरकारी बैंकों का होगा विलय? EAC-PM के नए पेपर से मची हलचल

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने पब्लिक सेक्टर बैंकों के विलय पर एक वर्किंग पेपर जारी किया है। रिपोर्ट में बड़े बैंकों के गठन का सुझाव दिया गया है, हालांकि सरकार ने अभी तक किसी भी मर्जर की योजना से इनकार किया है। इस समय बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ, डिपॉजिट ग्रोथ से तेज है, जो एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

विलय का तर्क और भविष्य की जरूरतें

आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की हालिया रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए अपने पब्लिक सेक्टर बैंकों को बड़े संस्थानों में तब्दील करना होगा। पेपर के अनुसार, बड़े बैलेंस शीट वाले बैंकों की जरूरत है ताकि वे इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं के लिए भारी फंडिंग कर सकें।

हालांकि, निवेशकों को यह साफ समझना होगा कि यह केवल एक नीतिगत सलाह है, न कि सरकार का कोई आधिकारिक निर्देश या मर्जर प्लान। वित्त मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सरकारी बैंकों के विलय का कोई औपचारिक प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

मर्जर के फायदे और चुनौतियां

रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े बैंक ग्लोबल लेवल पर बेहतर कॉम्पिटिशन कर सकते हैं और विदेशी मुद्रा वित्तपोषण में अधिक सक्षम होते हैं। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे आधुनिक तकनीक में निवेश के लिए बड़े बैंकों के पास बेहतर संसाधन होते हैं।

लेकिन इसके साथ जोखिम भी जुड़े हैं। पुराने अनुभवों से पता चला है कि बैंकों के विलय के बाद आईटी सिस्टम, कॉरपोरेट संस्कृति और एचआर स्ट्रक्चर को एकीकृत करना बेहद जटिल प्रक्रिया है। अगर अंदरूनी सुधार और मैनेजमेंट की स्वायत्तता पर ध्यान नहीं दिया गया, तो बड़े बैंक भी प्रशासनिक बाधाओं में फंस सकते हैं।

लिक्विडिटी का असली संकट

मौजूदा समय में निवेशकों के लिए बैंकों के आकार से ज्यादा अहम 'लिक्विडिटी' की स्थिति है। जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ 19.3% रही, जबकि डिपॉजिट ग्रोथ केवल 15.4% पर अटकी है। लोन बांटने और डिपॉजिट जुटाने के बीच का यह फासला बैंकों पर फंडिंग का दबाव बढ़ा रहा है। छोटे हों या बड़े, सभी बैंकों के लिए इस समय डिपॉजिट बेस को मजबूत करना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.