ब्रांचें बंद, अब चलेगा Representative Office
बैंक के बोर्ड ने इस अहम फैसले पर मुहर लगा दी है। कंपनी का कहना है कि यह भारत में उसकी रणनीति का बड़ा बदलाव है। 10 साल से ज्यादा समय तक फुल-फ्लेज्ड ब्रांच चलाने के बाद, अब Doha Bank सिर्फ एक Representative Office के तौर पर काम करेगा। इस बदलाव को भारतीय रेगुलेटरी अथॉरिटीज (Regulatory Authorities) से मंजूरी मिलनी बाकी है।
Doha Bank ने जून 2014 में भारत में अपनी शुरुआत की थी, पहली ब्रांच मुंबई में खुली और फिर कोच्चि में। बैंक का शुरूआती मकसद भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था का फायदा उठाना और खाड़ी देशों व भारत के बीच पैसे के ट्रांसफर को बढ़ावा देना था। 2016 में तो Doha Bank ने भारत में एक अलग सब्सिडियरी (Subsidiary) बनाने पर भी विचार किया था, जो उस वक्त उसकी मजबूत उम्मीदों को दिखाता था।
क्यों दूसरे विदेशी बैंक भी कर रहे हैं पीछे हटने की तैयारी?
Doha Bank का यह फैसला भारत में काम कर रहे दूसरे विदेशी बैंकों के लिए भी एक ट्रेंड का हिस्सा है। इससे पहले Citibank और Royal Bank of Scotland जैसे बड़े बैंक भी भारत में अपना रिटेल ऑपरेशन्स (Retail Operations) कम कर चुके हैं या पूरी तरह बंद कर चुके हैं। इसकी वजहें कई हैं, जिनमें घरेलू बैंकों से कड़ी प्रतिस्पर्धा, भारत के मुश्किल रेगुलेशंस (Regulations) का पालन करने की लागत और जटिलता, और बैंकों की बदलती ग्लोबल स्ट्रैटेजीज शामिल हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का जोर सख्त कंप्लायंस (Compliance), लोकल सेटअप और ओवरसाइट (Oversight) पर रहा है। ये जरूरतें छोटे ऑपरेशन्स वाले विदेशी बैंकों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती हैं। हाल ही में RBI के 2025 के लिए आए ड्राफ्ट रेगुलेशंस (Draft Regulations) में ऑफिस खोलने और बंद करने को आसान बनाने के साथ-साथ कंप्लायंस को और मजबूत करने के प्रस्ताव हैं। विदेशी बैंकों के लिए रिटेल बैंकिंग सेक्टर छोटी स्केल, कम ब्रांड रिकॉल (Brand Recall) और प्रॉफिट प्रेशर (Profit Pressure) के कारण मुश्किल हो गया है। इसी वजह से कई बैंक अब कॉरपोरेट बैंकिंग (Corporate Banking), वेल्थ मैनेजमेंट (Wealth Management) और इंस्टीट्यूशनल क्लाइंट्स (Institutional Clients) पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
Doha Bank की फाइनेंशियल मजबूती
हालांकि, भारत में इस स्ट्रेटेजिक बदलाव के बावजूद, Doha Bank अपने घरेलू बाजार में मजबूती और ग्रोथ दिखा रहा है। 2025 के पूरे साल के लिए बैंक ने QAR 920 मिलियन का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 8.0% ज्यादा है। 31 दिसंबर, 2025 तक बैंक की कुल संपत्ति QAR 120.2 बिलियन थी, और नेट लोन (Net Loans) QAR 67.7 बिलियन तक पहुंच गए थे। बैंक के पास मजबूत कैपिटल लेवल (Capital Levels) हैं, जिसमें कॉमन इक्विटी टियर 1 (Common Equity Tier 1) रेशियो 13.16% और टोटल कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (Total Capital Adequacy Ratio) 19.05% है। मार्च 2026 तक, Doha Bank का मार्केट वैल्यू (Market Value) करीब QAR 10.05 बिलियन था, जिसका P/E रेशियो लगभग 10.1x था। बैंक के शेयर मार्च 2026 के आखिर में करीब QAR 3.30 पर ट्रेड कर रहे थे।
एक प्रैक्टिकल मार्केट रिस्पांस
भारत में अपनी ब्रांचों को बंद करना Doha Bank के लिए एक रणनीतिक वापसी (Strategic Pullback) है। इससे लगता है कि भारत का रिटेल मार्केट, अपने बड़े आकार के बावजूद, उम्मीद से ज्यादा ऑपरेशनल और प्रॉफिट चुनौतियां पेश कर रहा था। जबकि विदेशी बैंक मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) बदलावों पर घरेलू बैंकों से तेजी से प्रतिक्रिया दे सकते हैं, लगातार प्रतिस्पर्धा और रेगुलेटरी मांगें Doha Bank के लिए भारत में एक व्यापक ब्रांच स्ट्रैटेजी को कम आकर्षक बना रही हैं। Representative Office में यह बदलाव रिटेल या कॉर्पोरेट बैंकिंग को ब्रांचों के जरिए बढ़ाने की बजाय, रिश्तों को बनाए रखने और खास अंतरराष्ट्रीय सौदों (International Deals) को संभालने पर केंद्रित है। यह भारतीय बाजार के लिए एक व्यावहारिक प्रतिक्रिया है, जहां विदेशी कंपनियों के लिए रिटेल ऑपरेशन्स बढ़ाना 2015-2016 के ग्रोथ-केंद्रित दृष्टिकोण के विपरीत, काफी कठिन हो गया है।