Department of Telecommunications (DoT) ने साइबर फ्रॉड के खिलाफ एक बड़ी जीत हासिल की है। अपने 'Financial Fraud Risk Indicator' के जरिए सरकार ने महज 15 महीनों में **₹5,043 करोड़** की संभावित धोखाधड़ी को होने से पहले ही रोक दिया है।
भारत में डिजिटल ट्रांजेक्शन की बढ़ती लोकप्रियता के बीच साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं। लेकिन अब सरकारी सिस्टम इस पर लगाम लगाने में सफल हो रहा है। मई 2025 में लॉन्च किए गए 'Financial Fraud Risk Indicator' (FRI) के जरिए DoT ने अब तक ₹5,043.73 करोड़ के फ्रॉड को विफल किया है।
कैसे काम करता है यह सिस्टम?
यह प्लेटफॉर्म 'Digital Intelligence Platform' का हिस्सा है। यह मोबाइल नंबरों को उनके रिस्क स्कोर—मीडियम, हाई या वेरी हाई—के आधार पर वर्गीकृत करता है। 'Sanchar Saathi' पोर्टल और 'National Cybercrime Reporting Portal' से डेटा लेकर यह सिस्टम बैंकों को अलर्ट भेजता है। जैसे ही कोई संदिग्ध ट्रांजेक्शन होता है, बैंक उसे फंड ट्रांसफर होने से पहले ही रोक देते हैं।
फिनटेक कंपनियों के लिए बड़ी राहत
अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच ही सिस्टम ने ₹2,000 करोड़ से अधिक के फ्रॉड को रोका है। फिलहाल 1,600 से ज्यादा बैंक, फिनटेक कंपनियां और इंश्योरेंस फर्म इस तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। निवेशकों के नजरिए से देखें, तो यह एक बड़ा सकारात्मक संकेत है। साइबर फ्रॉड के मामलों में कमी आने से इन कंपनियों का 'ऑपरेटिंग कॉस्ट' कम होगा और कस्टमर का भरोसा भी बढ़ेगा, जिससे उनके मार्जिन पर दबाव कम हो सकता है।
भविष्य की चुनौतियां
सिस्टम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह साइबर अपराधियों के नए तरीकों से कितनी तेजी से अपडेट होता है। RBI और NPCI के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सुरक्षा मानक मजबूत रहें। बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि यह तंत्र बिना किसी रुकावट के काम करता रहा, तो भारतीय डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम और अधिक सुरक्षित हो जाएगा।
