Digital Merchant Payments: त्योहारी सीजन में उछाल की उम्मीद, डिजिटल पेमेंट्स में दिखी हल्की सुस्ती

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AuthorAditya Rao|Published at:
Digital Merchant Payments: त्योहारी सीजन में उछाल की उम्मीद, डिजिटल पेमेंट्स में दिखी हल्की सुस्ती

सितंबर में डिजिटल मर्चेंट पेमेंट्स **0.8%** घटकर **₹11.4 लाख करोड़** पर आ गए हैं। Equirus Securities के जानकारों का मानना है कि त्योहारों की बदलती तारीखों के कारण आई यह गिरावट अक्टूबर और नवंबर में रिकवरी के साथ खत्म हो जाएगी।

भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में सितंबर के दौरान मामूली सुस्ती देखने को मिली है, जहां कुल ट्रांजेक्शन 0.8% गिरकर ₹11.4 लाख करोड़ पर पहुंच गए। Equirus Securities के एनालिस्ट इसे डिमांड में कमी नहीं, बल्कि त्योहारों के कैलेंडर में बदलाव मान रहे हैं। चूंकि इस साल दिवाली का समय थोड़ा आगे खिसका है, इसलिए त्योहारी खर्च की असली झलक अक्टूबर और नवंबर के डेटा में दिखने की पूरी उम्मीद है।

UPI का दबदबा बरकरार

पेमेंट मार्केट में UPI की धाक अब भी कायम है और सितंबर में इसकी हिस्सेदारी 77.6% रही। साल-दर-साल आधार पर UPI P2M ट्रांजेक्शन में 23.3% की दमदार ग्रोथ दर्ज की गई है। यह साफ दिखाता है कि छोटे-मोटे खर्चों के लिए लोग अब कैश की जगह UPI को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।

क्रेडिट और डेबिट कार्ड का हाल

दूसरी तरफ, कार्ड सेगमेंट में दबाव साफ है। क्रेडिट कार्ड का कुल खर्च सितंबर में साल-दर-साल 5.9% गिरकर ₹2.04 लाख करोड़ रहा। वहीं, डेबिट कार्ड की स्थिति और भी खराब है, जिसमें मंथ-ऑन-मंथ 7.3% और साल-दर-साल 7.6% की गिरावट आई है। डेटा के मुताबिक, क्रेडिट कार्ड का करीब 62% खर्च ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर हो रहा है, जहां प्रति कार्ड औसत खर्च ₹10,061 है, जबकि फिजिकल स्टोर्स पर यह केवल ₹6,204 है।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

निवेशकों को UPI की बढ़ती वॉल्यूम पर नजर रखनी चाहिए, जो डिजिटल खपत का मुख्य पैमाना है। हालांकि, क्रेडिट कार्ड खर्च में आती सुस्ती उन लेंडर्स के लिए चिंता का विषय हो सकती है, जिनकी कमाई कार्ड फीस पर निर्भर है। इसके अलावा, रेगुलेटरी मोर्चे पर अनसेक्युर्ड लेंडिंग को लेकर बढ़ती सख्ती का असर भी आने वाले महीनों में नजर आ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.