दिल्ली हाई कोर्ट ने NatWest Markets PLC के खिलाफ एक बड़ा फैसला सुनाते हुए बैंक को निर्देश दिया है कि वह अदालत के आदेश वाली **₹5.89 करोड़** की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर पुरानी ब्याज दरें बहाल करे। बैंक ने बिना किसी सूचना के **2018** में ब्याज दर को **7.75%** से घटाकर **3.5%** कर दिया था।
कोर्ट का सख्त रुख
न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन और न्यायमूर्ति शैल जैन की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बैंक किसी भी न्यायिक आदेश (Judicial Order) के तहत जमा की गई राशि के साथ मनमानी नहीं कर सकते। बैंक ने दलील दी थी कि डिपॉजिट मैच्योर होने के बाद RBI के नियमों के तहत ब्याज दर कम की गई थी, जिसे कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 2008 में Hero Exports और Tiffins Barrytes, Asbestos and Paints Limited के बीच मध्यस्थता के दौरान शुरू हुआ था। कोर्ट ने बैंक को अब आदेश दिया है कि वह ब्याज दर को कटौती से पहले के 3 सालों के औसत के आधार पर फिर से कैलकुलेट करे।
बैंकिंग सेक्टर के लिए सबक
यह फैसला उन सभी बैंकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो अदालती संरक्षण में रखी गई रकम का प्रबंधन करते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में बैंक केवल एक ट्रस्टी की तरह काम करते हैं और बिना अदालत की अनुमति के शर्तों में कोई भी बदलाव नहीं किया जा सकता। अब बैंकों को भविष्य में ऐसी डिपॉजिट्स को लेकर अधिक सतर्क रहने और कानूनी स्पष्टता लेने की आवश्यकता होगी, वरना उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।
