Unity Small Finance Bank: दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा झटका, कैपिटल बढ़ाने की योजना पर लगाई रोक

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AuthorNeha Patil|Published at:
Unity Small Finance Bank: दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा झटका, कैपिटल बढ़ाने की योजना पर लगाई रोक

Delhi High Court ने Unity Small Finance Bank के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें बैंक अपने ऑथराइज्ड कैपिटल को **₹4,000 करोड़** से बढ़ाकर **₹4,900 करोड़** करना चाहता था। अदालत ने साफ किया है कि इसके लिए BharatPe की पैरेंट कंपनी, Resilient Innovations जैसे बड़े शेयरधारकों की लिखित सहमति अनिवार्य है।

कोर्ट का सख्त रुख

दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने बैंक की उस अपील को खारिज कर दिया है जिसमें कैपिटल हाइक की मांग की गई थी। 5 नवंबर, 2026 को दिए गए इस फैसले के तहत, बैंक का बोर्ड अब बिना प्रमुख शेयरधारकों की सहमति के कोई भी बड़ा कदम नहीं उठा पाएगा।

क्यों मचा है विवाद?

बैंक का यह कदम वारंट्स को शेयर्स में बदलने की प्रक्रिया के लिए था। अगर यह योजना सफल हो जाती, तो Resilient Innovations (BharatPe की पैरेंट कंपनी) की हिस्सेदारी 49% से घटकर महज 21% रह जाती। बैंक ने इसे एक तकनीकी चूक बताया था, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को 'हताशा में दिया गया तर्क' करार देते हुए खारिज कर दिया।

क्या कहता है एग्रीमेंट?

कोर्ट ने 26 अक्टूबर, 2021 को हुए शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट को कानूनी रूप से बाध्यकारी माना है। इसके अनुसार, बैंक के किसी भी महत्वपूर्ण फैसले (Reserved Matter) के लिए Resilient Innovations और Centrum Financial Services दोनों की संयुक्त मंजूरी जरूरी है।

निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?

यह फैसला बैंकिंग सेक्टर में कॉर्पोरेट गवर्नेंस की अहमियत को दर्शाता है। बैंक के प्रमोटर्स के बीच जारी इस खींचतान से भविष्य में स्ट्रेटेजिक फैसले लेने में दिक्कतें आ सकती हैं। फिलहाल यह मामला एक सिंगल जज के पास पेंडिंग है, और बैंक को अब अपनी हर बड़ी कॉर्पोरेट गतिविधि के लिए कानूनी जटिलताओं से गुजरना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.