Delhi International Airport Limited (DIAL) ने **₹3,500 करोड़** का फंड जुटाया है। कंपनी इस रकम का इस्तेमाल अक्टूबर **2026** में मैच्योर होने वाले डॉलर बॉन्ड्स को चुकाने के लिए करेगी, जिससे उसे करेंसी उतार-चढ़ाव के जोखिम से राहत मिलेगी।
विदेशी कर्ज से मुक्ति की रणनीति
दिल्ली एयरपोर्ट (DIAL) ने 15 साल की अवधि वाले नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करके ₹3,500 करोड़ जुटाए हैं। इस फंड का मुख्य मकसद अक्टूबर 2026 में मैच्योर होने वाले $522.6 मिलियन के डॉलर-डिनोमिनेटेड नोट्स को चुकाना है। चूंकि कंपनी की कमाई का बड़ा हिस्सा रुपये में होता है, इसलिए डॉलर में कर्ज लेना कंपनी के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता था। अब रुपये में कर्ज लेकर कंपनी ने खुद को करेंसी फ्लक्चुएशन (Currency Fluctuation) से सुरक्षित कर लिया है।
ब्याज दरों का गणित
इस नए फंड पर सालाना 8.71% का कूपन रेट तय किया गया है। यह ब्याज दर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के रेपो रेट से जुड़ी है, जिसमें 375 बेसिस पॉइंट्स का एक्स्ट्रा स्प्रेड जोड़ा गया है। इस डील में 5 और 10 साल के अंतराल पर ब्याज दर को रीसेट (Reset) करने का विकल्प भी रखा गया है, और इन्वेस्टर्स को इसका भुगतान तिमाही आधार पर किया जाएगा।
बड़े निवेशकों का भरोसा
इस फंडरेज़िंग में भारत के कई बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने हिस्सा लिया है। इसमें India Infrastructure Finance Company Limited (IIFCL) का योगदान सबसे ज्यादा ₹1,426 करोड़ रहा। इसके अलावा NIIF Infrastructure Finance के साथ-साथ HDFC Bank, ICICI Bank, IDFC First Bank और SBI Capital Markets जैसे बड़े बैंकिंग दिग्गजों ने भी इसमें निवेश किया है।
अभी भी चुनौती बाकी
हालाँकि, 2026 के कर्ज को तो टाल दिया गया है, लेकिन DIAL पर अभी भी भारी कर्ज है। कंपनी के सामने जून 2029 में $500 मिलियन के डॉलर बॉन्ड के मैच्योर होने की चुनौती खड़ी है। अब बाजार के जानकार और क्रेडिट एजेंसियां इस बात पर नजर रख रही हैं कि कंपनी अपने कैश फ्लो और जमीन के मौद्रिकरण (Land Monetization) के जरिए इन भविष्य के दायित्वों को कैसे पूरा करती है।
