2026 में कमजोर मानसून के कारण बैंकों के एग्रीकल्चर लोन पोर्टफोलियो पर रिस्क मंडरा रहा है। देश भर में **₹10 लाख करोड़** से अधिक के Kisan Credit Card (KCC) लोन बकाया हैं, जिसे लेकर अब लेंडर सतर्क हो गए हैं।
मानसून की मार और बैंकिंग रिस्क
2026 के मानसून सीजन में हुई असमान और कम बारिश ने बैंकों की मुसीबत बढ़ा दी है। खरीफ की फसलों पर असर पड़ने से अब Kisan Credit Card (KCC) के तहत दिए गए कर्ज की रिकवरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल देश में 7.72 करोड़ से ज्यादा एक्टिव KCC कार्ड्स हैं, जिन पर कुल बकाया राशि ₹10 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है।
राज्यों का कदम और बैंकिंग लिक्विडिटी
कर्नाटक जैसे राज्यों ने सूखे की मार झेल रहे इलाकों में एग्रीकल्चर लोन पर 12 महीने का मोरेटोरियम (Moratorium) घोषित कर दिया है। इन प्रभावित क्षेत्रों के लिए कर्ज चुकाने की अवधि को 36 से 60 महीने तक बढ़ा दिया गया है। हालांकि इससे किसानों को फौरी राहत मिली है, लेकिन बैंकों के लिए यह कैश फ्लो में देरी का कारण बन सकता है, जिससे रूरल लोन बुक्स की लिक्विडिटी प्रभावित हो सकती है।
बैंकों पर असर और RBI की नई गाइडलाइन्स
State Bank of India (SBI), Bank of Maharashtra, और Canara Bank जैसे पब्लिक सेक्टर बैंक और HDFC Bank, Axis Bank जैसे प्राइवेट बैंक अपने पोर्टफोलियो की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं। निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता एसेट क्वालिटी (Asset Quality) है। अगर फसलों का उत्पादन कम रहता है, तो बैंकों को बैड लोन के लिए प्रोविजनिंग (Provisioning) बढ़ानी पड़ सकती है, जिसका सीधा असर उनके प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा।
इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नए KCC स्कीम नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होने जा रहे हैं। बैंकों को इन बदलावों के साथ तालमेल बिठाना होगा, जो आने वाली तिमाहियों में उनके फाइनेंशियल परफॉर्मेंस के लिए निर्णायक साबित होगा।
