DIPAM सचिव अरुणिश चावला ने IDBI Bank में सरकार की **60.72%** हिस्सेदारी Fairfax Financial Holdings को **₹81** प्रति शेयर के भाव पर बेचने के फैसले का बचाव किया है। यह डील लगभग **₹53,000 करोड़** की है, जिस पर अब पारदर्शिता और यूनियन के विरोध के कारण सवाल उठ रहे हैं।
सरकार के निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) ने IDBI Bank की बिक्री को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया है। सचिव अरुणिश चावला ने साफ किया कि पूरी प्रक्रिया एक सख्त 'डबल-ब्लाइंड' प्रोटोकॉल के तहत हुई है। उन्होंने उन आरोपों को खारिज किया जिनमें कहा गया था कि सरकार ने बोली जीतने वाले के पक्ष में रिजर्व प्राइस को बदला था। यह डील करीब ₹53,000 करोड़ की है।
वैल्युएशन और प्रक्रिया पर सवाल
राजनीतिक दलों और आलोचकों ने बिडिंग प्रोसेस की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। DIPAM ने स्पष्ट किया कि नीलामी को निष्पक्ष रखने के लिए बोलीदाताओं और वैल्युएशन एजेंसियों के बीच डेटा का कोई आदान-प्रदान नहीं था। रिजर्व प्राइस फिक्स नहीं किया गया था, बल्कि सरकार और Life Insurance Corporation of India (LIC) के मुनाफे को अधिकतम करने के लिए 'बेस्ट ऑफर' राउंड आयोजित किया गया था।
फिलहाल, IDBI Bank का शेयर ₹78 से ₹80 के दायरे में ट्रेड कर रहा है, जो ₹81 के ऑफर प्राइस से थोड़ा नीचे है। यह गैप बाजार में डील को लेकर बनी अनिश्चितता को दर्शाता है।
RBI की मंजूरी और अन्य चुनौतियां
डील अभी पूरी होने से दूर है। सबसे बड़ी बाधा Reserve Bank of India (RBI) का 'फिट-एंड-प्रॉपर' असेसमेंट है, जहां रेगुलेटर फंड के स्रोत और गवर्नेंस मानकों की जांच कर रहा है। इसके अलावा, 2-3 नवंबर 2026 को बैंक कर्मचारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल ने कामकाज पर दबाव बनाया है। साथ ही, जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) की जांच की मांग भी डील के लिए कानूनी जोखिम पैदा कर सकती है, जिससे इसे फाइनेंशियल ईयर 2027 के अंत तक पूरा करने के सरकारी लक्ष्य में देरी हो सकती है।
