घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने जुलाई महीने में इक्विटी में खरीदारी की रफ्तार को काफी धीमा कर दिया है। 23 जुलाई तक DIIs ने केवल **₹24,500 करोड़** का निवेश किया है, जो पिछले 16 महीनों का सबसे निचला स्तर है। फंड मैनेजर्स अपना पैसा रिकॉर्ड तोड़ प्राइमरी मार्केट इश्यू में लगा रहे हैं और पहली तिमाही के नतीजों को लेकर भी सतर्क हैं। हालांकि, लगातार SIP इनफ्लो से डोमेस्टिक मार्केट में भरोसा बना हुआ है।
Detailed Coverage
प्राइमरी मार्केट में बम्पर इश्यू ने खींचा पैसा
इस बार DIIs ने अपना फोकस सेकेंडरी मार्केट से हटाकर प्राइमरी मार्केट की ओर मोड़ दिया है। यानी, IPO (Initial Public Offering) और QIP (Qualified Institutional Placement) में निवेश बढ़ा है। इस महीने अब तक 9 IPOs के जरिए ₹17,283 करोड़ जुटाए गए हैं, वहीं 6 QIPs से ₹20,800 करोड़ आए हैं। इससे फंड मैनेजर्स के पास सेकेंडरी मार्केट में मौजूदा शेयरों को खरीदने की क्षमता या इच्छा कम हो गई है।
कमाई और ग्लोबल टेंशन का असर
प्राइमरी मार्केट के अलावा, ग्लोबल अनिश्चितता भी फंड मैनेजर्स को सतर्क कर रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का $100 प्रति बैरल के करीब पहुंचना, जोखिम को बढ़ा रहा है। इसके साथ ही, FY27 के लिए जून तिमाही के नतीजों का सीजन चल रहा है। इन सब वजहों से निवेशक मैनेजमेंट की कमेंट्री का इंतजार कर रहे हैं। इसी झिझक का असर बाजार पर भी दिख रहा है, जहां सेंसेक्स और निफ्टी जुलाई में अब तक मामूली 0.1% गिरे हैं।
आगे क्या? सेक्टर पर फोकस
हालांकि खरीदारी की रफ्तार धीमी हुई है, लेकिन यह डोमेस्टिक मार्केट में भरोसे की कमी का संकेत नहीं है। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में लगातार इनफ्लो जारी है, जो मार्केट को सहारा दे रहा है। फंड मैनेजर्स फिलहाल उन सेक्टरों पर ध्यान दे रहे हैं जहां कमाई का अनुमान साफ है। प्राइवेट सेक्टर बैंक और फाइनेंशियल सेक्टर अपनी वैल्यूएशन के कारण आकर्षक बने हुए हैं। इसके अलावा, कैपिटल गुड्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस जैसे सेक्टर भी सरकारी खर्च और मजबूत ऑर्डर बुक के चलते फोकस में हैं। बाजार की आगे की चाल तिमाही नतीजों और फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) के सेंटिमेंट पर निर्भर करेगी।
