DGGI ने बैंकों और पेमेंट गेटवेज के लिए नई गाइडलाइन्स का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत हर डिजिटल ट्रांजैक्शन का सोर्स वेबसाइट यूआरएल रिकॉर्ड करना अनिवार्य होगा। यह कदम **₹70,000 करोड़** के अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क को तोड़ने के लिए उठाया गया है, जिससे फिनटेक सेक्टर पर कंप्लायंस का बोझ बढ़ सकता है।
सट्टेबाजी का चक्रव्यूह तोड़ना
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) अब डिजिटल पेमेंट के हर लिंक को ट्रैक करने की तैयारी में है। 14 महीने तक चली लंबी जांच के बाद एजेंसी ने पाया कि अवैध गेमिंग प्लेटफॉर्म्स प्रॉक्सी मर्चेंट अकाउंट्स का इस्तेमाल कर अपना असली ठिकाना छुपाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक फाइनेंशियल ईयर में ₹70,000 करोड़ के संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आए हैं, जो इस अवैध इकोसिस्टम की गहराई को दर्शाते हैं।
फिनटेक कंपनियों के लिए चुनौतियां
अगर डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू इन प्रस्तावों को मंजूरी देता है, तो पेमेंट एग्रीगेटर्स और बैंकों को अपने ऑपरेशंस में बड़ा बदलाव करना होगा। मौजूदा सिस्टम में पेमेंट गेटवे को सिर्फ मर्चेंट अकाउंट दिखता है, न कि असली गेमिंग वेबसाइट। नए नियमों के बाद कंपनियों को हर पेमेंट को उसके सोर्स से लिंक करना होगा। इससे फिनटेक कंपनियों को अपने कंप्लायंस सिस्टम और मर्चेंट ड्यू डिलिजेंस प्रोसेस को और अधिक सख्त बनाना होगा, जिसमें भारी निवेश की जरूरत पड़ सकती है।
सरकार की सख्त नजर
यह कदम अवैध गेमिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ सरकार की बड़ी मुहिम का हिस्सा है। अब तक 357 अवैध गेमिंग वेबसाइट्स को ब्लॉक किया जा चुका है और टैक्स चोरी में शामिल हजारों बैंक अकाउंट्स को फ्रीज किया गया है। सरकार अब उन सभी संस्थाओं पर कड़ी नजर रख रही है जो हाई-रिस्क मर्चेंट सेगमेंट को पेमेंट सर्विसेज मुहैया कराती हैं।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
फिलहाल, डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू इस बात पर विचार कर रहा है कि यह जिम्मेदारी किस पर होगी—गेमिंग प्लेटफॉर्म, पेमेंट गेटवे या बैंक पर। निवेशकों को अब सरकार की अंतिम नोटिफिकेशन का इंतजार है, क्योंकि इसी से स्पष्ट होगा कि इन कंपनियों के ट्रांजैक्शन वॉल्यूम और फीस स्ट्रक्चर पर कितना असर पड़ेगा।
